पटना /बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभागार में नव सृजन एवं सर्वांगीण विकास संस्थान की ओर से भव्य समारोह का आयोजन
अमित सिंह की रिपोर्ट /राजधानी पटना के बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभागार में नव सृजन एवं सर्वांगीण विकास संस्थान की ओर माता स्वर्गीय सिया मनीदेवी और पिता स्वर्गीय राम जतन प्रसाद सिंह की स्मृति में एक भव्य समारोह का आयोजन उनकी सुपुत्री पूजा ऋतुराज ने…
पटना /महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिधर्मी महाकवि थे रामचंद्र जायसवाल- जयंती पर साहित्य सम्मेलन में डा ममता मिश्र के कहानी-संग्रह ‘भव्या’ का हुआ लोकार्पण
पटना, १९ दिसम्बर। हिन्दी के महान सपूतों में से एक महाकवि रामचंद्र जायसवाल अनेकों महाकाव्यों के मनीषी सर्जक ही नहीं, एक बलिदानी स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिधर्मी महाकवि भी थे। उन्होंने हिन्दी साहित्य में प्रबंध-काव्य को नई ऊर्जा दी और ‘रामायण’…
पटना /साहित्य सम्मेलन में पं सकल नारायण शर्मा की जयंती पर मगही उपन्यास ‘पेंशन के बताशा’ का हुआ लोकार्पण,डा जमुआर के उपन्यास में व्यवस्था के दोष उजागर होते हैं : प्रो अमरनाथ सिन्हा
पटना, १६ दिसम्बर। लोकभाषाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए आवश्यक है कि लेखक कविगण अपनी रचनाओं में ‘देशज’ शब्दों का प्रयोग करें। तत्सम शब्दों से इसकी मौलिकता नष्ट होती है। आकाशवाणी के पूर्व सहायक निदेशक और दूरदर्शन के पूर्व कार्यक्रम प्रमुख डा ओम्…
पटना /अत्यंत लुभावना है कवि अमरेन्द्र नारायण का साहित्यिक व्यक्तित्व- साहित्य सम्मेलन में पुस्तक ‘उत्साह तुम्हारा अभिनंदन’ तथा ‘प्रवासी साहित्यकार अमरेन्द्र नारायण’ का लोकार्पण
पटना, ५ दिसम्बर । वरिष्ठ साहित्यकार और कवि अमरेन्द्र नारायण काव्य-प्रतिभा से संपन्न एक प्रभावशाली रचनाकार ही नहीं, एक समर्थ जीवनीकार भी हैं। इनका साहित्यिक व्यक्तित्व अत्यंत लुभावना है। इनकी रचानाएँ इनके अत्यंत मृदुल व्यवहार की भाँति ही पाठकों के मन को…
पटना /प्रेम और जीवन-दर्शन के गीतकार थे बच्चन, सरस्वती की साक्षात विग्रह थीं मृदुला जी- साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष रह चुके थे काशी प्रसाद जायसवाल, कवियों ने दी श्रद्धांजलि
पटना, २९ नवम्बर। मानव-जीवन, जीवन-मूल्य, प्रेम, उत्साह और दर्शन के महान गीतकार थे हरिवंश राय बच्चन। हिन्दी-काव्य में छायावाद-काल के उत्तरार्ध में एक नूतन और मृदुल-स्पर्श लेकर आए बच्चन जी ने मनुष्यता को जीवन-रस प्रदान करने वाले ‘प्रेम’ को नई…
पटना /वैश्विक हिन्दी सम्मेलन एवं केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के तत्त्वावधान में आयोजित हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी- वैश्विक हिन्दी सम्मेलन एवं केंद्रीय हिन्दी संस्थान,जनता को जनता की भाषा में न्याय मिले : न्यायमूर्ति मृदुला मिश्र
पटना, २६ नवम्बर। न्यायालयों की भाषा जितनी शीघ्रता से भारतीय भाषाएँ हो जाए, राष्ट्रहित में उतना ही अच्छा है। जनता को जनता की भाषा में ही न्याय मिले, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। भारत का संपूर्ण विकास तभी होगा जब, देश की कार्यपालिका, न्यायपालिका और…
पटना /इस समय के सबसे बड़े हिन्दी गजल-गो हैं ‘करुणेश’, साहित्य सम्मेलन में ग़ज़ल-संग्रह ‘रस्ते में गुलमुहर है’ का हुआ लोकार्पण
पटना, १८ नवम्बर। “कहने को तो कहते है ग़ज़ल और बहुत लोग/ कहते हैं मगर लोग की कहता हूँ ग़ज़ल मैं”। ये पंक्तियाँ सुनने में कवि की गर्वोक्ति लग सकती है, किंतु यह सत्य है कि हिन्दी और मगही के वरिष्ठ कवि मृत्युंजय मिश्र ‘करुणेश’ वर्तमान…
पटना /देश को एक सूत्र में जोड़ने के लिए हिन्दी संपर्क की राष्ट्रभाषा होने योग्य : आरिफ़ मोहम्मद खान, मनाया गया बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का १०४वाँ स्थापना दिवस समारोह
पटना, १४ नवम्बर। केरल के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान ने कहा है कि देश की सभी भाषाएँ राष्ट्र की ही भाषाएँ ही है। किंतु देश को एक सूत्र में जोड़ने के लिए संपर्क की एक राष्ट्र भाषा होनी ही चाहिए और हिन्दी में इसके पर्याप्त गुण हैं।श्री खान ने यह बातें सोमवार…
पटना /महान काव्य-तपस्वी थे ‘रुद्र’ और ‘वियोगी’, अंग्रेजों को भयभीत कर रखा था मनोरंजन बाबू की ‘फिरंगिया’ ने- जयंती पर साहित्य सम्मेलन में तीनों साहित्यिक विभूतियों को दी गई काव्यांजलि
पटना, २ नवम्बर। हिन्दी काव्य के महान तपस्वी थे ‘रुद्र’ और ‘वियोगी’ । मोक्षभूमि गया के ये दोनों काव्य-पुरुष, पं मोहन लाल महतो ‘वियोगी’ और छंदों के मर्म-स्पर्शी गीतकार रामगोपाल शर्मा ‘रुद्र’ हिन्दी साहित्य की…
पटना /प्राकृत और अपभ्रंश के अंतिम अधिकारी विद्वान थे आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने अपने पूर्व प्रधानमंत्री को दी श्रद्धांजलि
पटना, २८ अक्टूबर। बहुभाषाविद मनीषी आचार्यवर्य श्रीरंजन सूरिदेव ‘प्राकृत’ और ‘अपभ्रंश’ भाषाओं के अंतिम अधिकारी विद्वान थे। वे सरस्वती के लोक-प्रसिद्ध वरद-पुत्र और एक साहित्यिक साधु-पुरुष थे। उन्होंने एक संत की भाँति साहित्य की…
पटना /साहित्य सम्मेलन ने श्रद्धापूर्वक स्मरण किया अपने प्रथम सभापति को, दी काव्यांजलि
पटना, १२ अक्टूबर। हिन्दी जिनके प्राणों में बसती थी और जो उसके लिए सदैव प्राण त्यागने को तत्पर रहते थे, ऐसे कवि साहित्यकार थे पं जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी। खड़ी बोली हिन्दी की प्रथम पीढ़ी के महान कवियों और भाषाविदों में अग्रपांक्तेय विद्वान पं चतुर्वेदी,…
पटना /साहित्य सम्मेलन में श्रद्धा से स्मरण किए गए राष्ट्रकवि दिनकर, कवियों ने दी गीतांजलि
पटना, २३ सितम्बर। ‘जला अस्थियाँ बारी-बारी, चिटकाई जिनने चिनगारी/ जो चढ़ गए पुण्य-वेदी पर, लिए बिना गर्दन का मोल / कलम आज उनकी जय बोल” ! राष्ट्र्कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इन पंक्तियों के साथ, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के…