CIN /अंग नहीं तो क्या ग़म है, हम किसी से क्या कम हैं! विश्व विकालांग दिवस की पूर्व संध्या पर निकाली गई जागरूकता रैली
पटना, २ दिसम्बर । “अंग नहीं तो क्या ग़म है, हम किसी से क्या कम हैं! —– “दया नहीं अधिकार चाहिए! हमें थोड़ा सा प्यार चाहिए।” , आदि नारों के साथ आज विकालांग जनों ने नगर में जागरूकता रैली निकाली। यह रैली विश्व विकलांग दिवस की…
पटना /प्रेरणा सम्मान से विभूषित किए गए डा अनिल सुलभ एवं विजय प्रकाश अभिलाषा ज्योति फ़ाउंडेशन द्वारा वृद्धजन दिवस पर आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम
पटना , १ अक्टूबर। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ को, उनके अनुशासित, कल्याणकारी और प्रेरणास्पद व्यक्तित्व और विशद साहित्यिक अवदान के लिए, प्रेरणा सम्मान से विभूषित किया गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी और बिहार…
पटना /उप मुख्यमंत्री ताराकिशोर प्रसाद ने साहित्याकारों को ‘बिहार साहित्य गौरव सम्मान’ से विभूषित किया
पटना, २९ सितम्बर। बिहार एजूकेशनल रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट संस्थान के तत्त्वावधान में, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ७१ वें जन्मोत्सव पर, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, एक समारोह आयोजित कर बिहार के साहित्याकारों को ‘बिहार साहित्य गौरव…
पटना /dr.अनिल सुलभ के आवास पर जगत-आरोग्य की प्रार्थना के साथ उगते सूर्य को दिया अर्घ्य
३१ मार्च। उदितमान सूर्य को अर्घ्य-दान के साथ सूर्योंपासना का अत्यंत महनीय पर्व सूर्य-सष्टि व्रत आज संपन्न हो गया। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने अपने घर पर आहूत। लोक-आस्था के इस महा पर्व के अंतिम दिन उग रहे नवल सूर्य को इस…
भारत की सबसे बड़ी पूँजी है देश की युवा शक्ति : मंत्री । डा राजेंद्र प्रसाद कला एवं युवा समिति के ५वें वार्षिकोत्सव पर ९ विभूतियों का हुआ सम्मान ,साहित्य सम्मेलन में भरत सिंह ‘भारती’ को मिला ‘कौस्तुभ मणि’ सम्मान
पटना, ७ मार्च। भारत की सबसे बड़ी पूँजी देश की युवा शक्ति है। यदि इनकी प्रतिभा और श्रम का सदुपयोग शतप्रतिशत किया जा सके तो भारत को विश्व के समृद्धतम राष्ट्र होने से कोई नही रोक सकता। यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमारी शिक्षा–प्रणाली देश के युवाओं को…
संत रविदास ने संसार को यह बताया कि एक अंत्यज्य भी ब्रह्म-स्वरूप को पा सकता है । आधुनिक भारत के महान वेद-व्याख्याकार है दयानंद सरस्वती। प्रबुद्ध हिन्दू समाज के तत्त्वावधान में दोनों मनीषियों की मनाई गई जयंती
पटना, २२ जनवरी। ब्रह्म–तेज़ प्राप्त करने वाले महान संत रविदास एक ऐसे महात्मा थे जिन्होंने यह सिद्ध किया कि ब्रह्म–तत्व को प्राप्त करना हर उस व्यक्ति के लिए संभव है, जो मन–प्राण से प्रभु का हो जाता है। इसके लिए किसी कुलीन वंश में उत्पन्न…
आलोचना-साहित्य के शिखर-पुरुष थे आचर्य नलिन विलोचन शर्मा । जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई संगोष्ठी, दी गई काव्यांजलि
पटना, १८ फ़रवरी। हिंदी साहित्य में अतुल्य अवदान देनेवाले तथा काव्य में प्रपद्य–वाद के प्रवर्त्तक आचार्य नलिन विलोचन शर्मा आलोचना–साहित्य के शिखर–पुरुष थे। वे न होते तो श्रेष्ठ आँचलिक उपन्यासकारके रूप में हिन्दी साहित्य में प्रतिष्ठित हो…
एक संवेदनशील और प्रतिभावान कवि थे हृषीकेश पाठक । निधन से साहित्य-जगत को बड़ी क्षति, साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा
पटना, १७ फ़रवरी। पेशे से अभियंता, हृदय से कवि और विनम्र समाजसेवी थे हृषीकेश पाठक। वे एक संवेदनशील और प्रतिभावान कवि थे। समाज को प्रेरित करने वाली उनकी रचनाओं में लोक–पीड़ा और उनके प्रतिकार के प्रखर स्वर हैं। साहित्य और साहित्यकारों के प्रति उनके मन…
कविता हृदय के घावों को हीं नही भरती, मन-प्राण को नवीन ऊर्जा भी देती है । साहित्य सम्मेलन में वरिष्ठ कवि प्रणय कुमार सिन्हा के काव्य-संग्रह ‘छूना है आकाश’ का हुआ लोकार्पण,आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, १५ फ़रवरी। कविता हृदय के घावों को हीं नहीं भरती, मन प्राण को नवीन ऊर्जा भी प्रदान करती है। इसमें प्राण–दायी शक्ति है। गीत और संगीत हीं मन की मलीनता को दूर कर मनुष्य को ‘मनुष्य‘ बनाता है। मानव–जीवन इसके अभाव में चल नहीं सकता।…
भारतीय-दर्शन में आधुनिक समाज की सभी समस्याओं का निदान । साहित्य सम्मेलन में कीर्ति-शेष चिंतक-कवि हृदय नारायण की स्मृति में आयोजित हुई संगोष्ठी
पटना, ९ फ़रवरी। भारतीय–दर्शन में आधुनिक–समाज की सभी समस्याओं का निदान और सभी प्रश्नों के उत्तर अंतर्निहित हैं। यह मानव–समुदाय की एक ऐसी पूँजी है, जिस पर देव–तुल्य मनुष्यों की पीढ़ी तैयार की जा सकती है। इसमें निखिल वसुधा के कल्याण…
युग-प्रवर्त्तक साहित्यकार थे महाकवि जयशंकर प्रसाद, निराला तो थे ही निराले। दोनों महाकवियों की जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ वासंती-काव्योत्सव
पटना, ३० जनवरी। महाकवि जयशंकर प्रसाद एक युग–प्रवर्त्तक साहित्यकार थे, जिन्होंने एक साथ, कविता, कहानी, उपन्यास और नाटक लेखन के क्षेत्र में हिन्दी साहित्य को गौरवान्वित करने वाली, विश्व–विश्रुत महाकाव्य ‘कामायनी‘ समेत अनेक अनमोल…
एक संपूर्ण सारस्वत राजनैतिक व्यक्तित्व थे सुधांशु जी। जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई राजभाषा-संगोष्ठी
कौशलेन्द्र पाण्डेय, पटना, १८ जनवरी। हिन्दी भाषा के उन्नयन में भारत के जिन महानुभावों ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनमें एक अत्यंत आदरणीय नाम डा लक्ष्मी नारायण सिंह ‘सुधांशु‘ जी का है, जो बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी थे और…