CIN /हिन्दी-संस्कृत ही नहीं तमिल-तेलगू की भी विदुषी थीं डा मिथिलेश कुमारी- जयंती पर साहित्य सम्मेलन में चर्चित कवयित्री सुधा कुमारी जूही की पुस्तक ‘समंदर का शहर’ का हुआ लोकार्पण
पटना, १ दिसम्बर। बिहार राष्ट्रभाषा परिषद की निदेशक रहीं विश्रुत लेखिका डा मिथिलेश कुमारी मिश्र हिन्दी और संस्कृत की ही नहीं, तमिल और तेलगू समेत अनेक दक्षिण-भारतीय भाषाओं की विदुषी लेखिका थीं। उन्हें पाली, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं का भी विशद ज्ञान था। एक…
CIN /जयंती पर साहित्य सम्मेलन में चर्चित कवयित्री सुधा कुमारी जूही की पुस्तक ‘समंदर का शहर’ का हुआ लोकार्पण
पटना, १ दिसम्बर। बिहार राष्ट्रभाषा परिषद की निदेशक रहीं विश्रुत लेखिका डा मिथिलेश कुमारी मिश्र हिन्दी और संस्कृत की ही नहीं, तमिल और तेलगू समेत अनेक दक्षिण-भारतीय भाषाओं की विदुषी लेखिका थीं। उन्हें पाली, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं का भी विशद ज्ञान था। एक…
पटना /जियालाल आर्य के साहित्य में लोक-मंगल के भाव और उद्धार का आह्वान,साहित्य सम्मेलन में काव्य-पुस्तक ‘दो भिक्षुणियाँ’ का हुआ लोकार्पण
पटना, २९ नवम्बर। गद्य और पद्य में समान अधिकार से लिख रहे वरिष्ठ साहित्यकार जियालाल आर्य के साहित्य में काव्य-आदर्श के समान लोक-मंगल के भाव हैं। उत्पीड़न के विरुद्ध इनके प्रतिकार के स्वर भी कठोर नहीं, अपितु प्रियकर और प्रभावकारी हैं। इनमे विध्वंस का…
CIN /क़ानून बेकार है यदि उसका अनुपालन सुनिश्चित न हो : न्यायमूर्ति,संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर विधि-पत्रिका ‘विधि-विमर्श’ का हुआ लोकार्पण
पटना, २५ नवम्बर। क़ानून बेकार है, यदि उसका अनुपालन सुनिश्चित न किया जाए। जीवन ‘नेचुरल लौ’ से चलता है और शासन क़ानून से। किंतु यह सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है। भारत की न्यायपालिका से न्याय की जो अपेक्षा की जाती है, उस पर वह खरी नहीं उतर रही।…
पटना /पोद्दार रामावतार अरुण,गोपी वल्लभ के जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने दोनों काव्य-विभूतियों को दी श्रद्धापूर्ण काव्यांजलि
पटना, २४ नवम्बर। ‘वाणाम्बरी’, ‘कृष्णाम्बरी’, ‘अरुण रामायण’ और ‘महाभारती’ जैसे दशाधिक महाकाव्यों सहित ४५ मूल्यवान ग्रंथों की रचना कारने वाले, महाकवि पोद्दार रामावतार ‘अरुण’, हिन्दी साहित्य के…
पटना /साहित्य सम्मेलन में गोवा और महाराष्ट्र के साहित्यकारों का हुआ सम्मान और काव्य-पाठ
पटना, २१ नवम्बर। बड़ी कविता वही है जो संसार को सुंदर बनाती है। कविता लोक-रंजक और कल्याणकारी होनी चाहिए। जिसमें पाठकों का हृदय जीत लेने और गुणात्मक परिवर्तन लाने की शक्ति हो, वही रचना सार्थक और दीर्घायु होती है। बड़ी कविता, प्रेम से लबालब भरे विशाल हृदय…
पटना /साहित्य सम्मेलन में मनाया गया दीपोत्सव, संसार में प्रेम और सद्भाव के लिए की गयी प्रार्थना
पटना, १३ नवम्बर। कदमकुआं स्थित बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ की उपस्थिति में उत्साह-पूर्वक दीपोत्सव मनाया गया तथा बिहार समेत संपूर्ण संसार में प्रेम और सद्भाव की वृद्धि के साथ सुख-समृद्धि के लिए महालक्ष्मी से प्रार्थना की…
CIN /बिहार के प्रथम स्मरणीय हैं डा सच्चिदानन्द सिन्हा, साहित्य और राजनीति के आदर्श थे बदरीनाथ वर्मा-साहित्य सम्मेलन में दोनों विभूतियों की मनाई गई जयंती
पटना, १० नवम्बर। बिहार वासियों के लिए, महान शिक्षाविद डा सच्चिदानंद सिन्हा प्रथम-स्मरणीय महापुरुष हैं। उनके ही अथक प्रयास और पुरुषार्थ से बंग-भंग हुआ और ‘बिहार’ को अलग राज्य का स्थान प्राप्त हुआ। इस दृष्टि से वे बिहार के जनक हैं। उन्हें…
पटना ब्यूरो /अमर रचनाकारों बाबू रघुवीर नारायण और प्राचार्य मनोरंजन प्रसाद सिन्हा को एक साथ स्मरण किया गया,दी गयी काव्यांजलि
पटना, १ नवम्बर। भोजपुरी के दो अविस्मरणीय गीत ‘बटोहिया’ और इसी तर्ज़ पर लिखा गया दूसरा गीत ‘फिरंगिया’, स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार समेत पूर्वांचल के समस्त स्वतंत्रता सेनानियों के लिए ‘राष्ट्र-गीत’ बन गए थे। पहली रचना…
पटना /यश की लालसा से दूर अपने समय के सबसे बड़े साहित्यकार थे श्रीरंजन सूरिदेव, जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ समारोह
पटना, २८ अक्टूबर । नाम-यश की लालसा से सर्वथा दूर, एकांतिक साधना में निमग्न, साहित्य के पर्यावाची शब्द थे, आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव। अपने समय के वे सबसे बड़े साहित्यकार थे। उनके संपूर्ण व्यक्तित्व से ‘साहित्य’ टपकता था। साहित्यकार को…
पटना /हिन्दी’ के लिए नेहरू से लड़ पड़े सेठ गोविन्द दास, मुख्यमंत्री पद की दे दी बलि-साहित्य सम्मेलन ने दी काव्यांजलि
पटना, १६ अक्टूबर। महात्मा गांधी के आह्वान पर भारत के जिन महान त्यागियों ने अपना ऐश्वर्यपूर्ण सुखमय जीवन का त्याग कर दिया और देश-सेवा के लिए समर्पित हो गए, उनमे सेठ गोविन्द दास का नाम परम श्रद्धेय है। स्वतंत्रता-संग्राम के दौरान और उसके बाद राष्ट्रभाषा…
पटना /साहित्य सम्मेलन में मनायी गई जयंती- कवियों ने दी काव्यांजलि, कथाकारों ने किया लघुकथा-पाठ
पटना, १२ अक्टूबर। हिन्दी साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखने वाले विद्वान समालोचक डा कुमार विमल काव्य में सौंदर्य-शास्त्र के महान आचार्य और अपने समय के जीवित साहित्य-कोश थे। उनका संपूर्ण जीवन, साहित्य और पुस्तकों के साथ अहर्निश जुड़ा रहा। वे प्रायः ही…