‘साथी’ उपनाम को चरितार्थ करते थे सच्चिदानंद सिंह साथी, निधन पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई शोक-गोष्ठी
पटना-कौशलेन्द्र पाण्डेय, ‘साथी‘ जी एक गुणी साहित्यकार, एक विद्वान प्राध्यापक और प्रभावशाली वक़्ता हीं नहीं एक कर्मठ संगठन–कर्ता भी थे। अपने मित्रों और सहयोगियों के प्रति सदैव जागरूक और संवेदनशील रहते थे। इस प्रकार उन्होंने जो अपना…
विश्व में तेज़ी से फैल रही हिन्दी अपने हीं देश में उपेक्षित,शीघ्र घोषित हो भारत की राष्ट्रभाषा-डा० अनिल सुलभ
पटना-कौशलेन्द्र पाण्डेय, १० जनवरी। हिन्दी एक सरस और मधुर भाषा है। यह अपने गुणों के कारण पूरे विश्व में विस्तृत हो रही है। किंतु पीड़ा और लज्जा का विषय है कि यह अपने देश में हीं उपेक्षित है। लज्जा का विषय यह भी है कि, इस देश की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है।…
नृत्य-ऋषि थे डा मोहिनी तो अंगिका के तपस्वी कवि थे चकोर । जयंती पर साहित्य सम्मेलन में दोनों सांस्कृतिक-विभूतियों को दी गई संगीतांजलि और काव्यांजलि
पटना-कौशलेन्द्र पाण्डेय, पटना, ६ जनवरी। नृत्य के ऋषि आचार्य थे डा नगेंद्र प्रसाद ‘मोहिनी‘। नई पीढ़ी को नृत्य में प्रशिक्षित करने तथा नृत्य–साहित्य के लेखन में उनका महान अवदान है। वहीं अंगिका के तपस्वी साधक थे डा नरेश…
बहुगुण प्रतिभा संपन्न पत्रकार और कवि हैं हृदय नारायण झा। ६०वें जन्मोत्सव पर किया गया अभिनंदन, लगाया गया योग-प्रशिक्षण शिविर
कौशलेन्द्र पाण्डेय, पटना, २६ दिसम्बर। वरिष्ठ पत्रकार, कवि और कलाकार हृदय नारायण झा बहुगुण प्रतिभा संपन्न सम्मान्य पुरुष हैं। योग और योग–साहित्य पर भी श्री झा का अत्यंत मूल्यवान कार्य हुआ है। नित्य योगाभ्यासी श्री झा ने योग के आचार्य के रूप में…
भारतीय-आत्मा थे महामना मालवीय, अटल जी महाकवि होते यदि नेता न होते। भारत के इन दोनों रत्नों की जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने दी काव्यांजलि
कौशलेन्द्र पाण्डेय, पटना, २५ दिसम्बर । भारतीय आत्मा की जीवंत मूर्ति थे मालवीय जी। हिन्दी और भारतीय संस्कृति की शिक्षा के लिए दिया गया उनका अवदान कभी भुलाया नही जा सकता। वे संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी के विश्रुत विद्वान हीं नही अद्भुत वक़्ता भी थे।…
जीवन भर अपने हृदय में अग्नि का पोषण करते रहे कलम के जादूगर रामवृक्ष बेनीपुरी। जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने श्रद्धा से स्मरण किया अपने पूर्व अध्यक्ष को, आयोजित हुई लघुकथा-गोष्ठी
कौशलेन्द्र पाण्डेय, पटना, २३ दिसम्बर। तरुणाई से मृत्यु तक वे अपने सीने में, अग्नि का पोषण करते रहे। क्रांति और विद्रोह की एक ज्वाला उनके हृदय में सदा धधकती रही। उनके भीतर जल रही वही अग्नि उनकी लेखनी से ऐसे साहित्य का सृजन करती रही, जो न केवल…
विदुषी कवयित्री डा सुषमा की कविताओं का मूल भाव मंगलाचरण का है। साहित्य सम्मेलन में कवयित्री के दो काव्य-संग्रहों ‘नवोन्मेष’ तथा ‘हाशिये पर खड़े लोग’ का हुआ लोकार्पण,आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना-कौशलेन्द्र पाण्डेय, १७ दिसम्बर। संस्कृत–साहित्य में गहरी अभिरुचि रखने वाली विदुषी डा सुषमा कुमारी मंगल भाव की कवयित्री हैं। इनका स्वर मंगलाचरण का है। इनकी कविताएँ, पीड़ित मन के आँसू पोंछकर उनके हृदय में एक नए उत्साह का सृजन करती हैं। वैदिक…
साहित्य सम्मेलन के चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को कंबल दिया गया, डॉ अनिल सुलभ रहे उपस्थित
पटना-कौशलेन्द्र पाण्डेय पटना, १२ दिसम्बर। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के चतुर्थ–वर्गीय कर्मियों को, सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेंद्रनाथ गुप्त की ओर से कंबल भेंट किए गए। उनकी ओर से सम्मेलन–अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कर्मियों को कंबल प्रदान किया।…
साहित्य समाज का दर्पण हीं नही समाज के विविध रूपों का प्रतिनिधित्व करता है : विजय शंकर दूबे । वरिष्ठ साहित्यकार प्रो शशिशेखर तिवारी की पुस्तक ‘साहित्य-चिंतन’ का हुआ लोकार्पण
पटना कौशलेन्द्र पांडेय, साहित्य सिर्फ़ समाज का प्रतिनिधित्व हीं नही करता,समाज की आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक व्यवस्था का भी प्रतिनिधित्व करता है। साहित्य वही है सच्चा है, जिसका प्रभाव कभी न समाप्त होता है। प्रो शशि शेखर तिवारी के…
दिव्यांगों के पुनर्वास में तेज़ी लाने के लिए पुनर्वास-विभाग का सृजन आवश्यक । हेल्थ इंस्टिच्युट में ५दिवसीय विश्व विकलांग दिवस समारोह तथा चिकित्सा-विज्ञान पुस्तक मेला का हुआ उद्घाटन
पटना कौशलेन्द्र पराशर, पटना, २ दिसम्बर । बिहार में विकलांगजनों को जिन्हें सरकार अब दिव्यांग कहने लगी है, के वैज्ञानिक दृष्टि से मूल्यांकन तथा शारीरिक,शैक्षणिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए, अलग से एक विभाग का सृजन किया जाना आवश्यक है। केंद्र सरकार समेत देश…
प्रत्येक साहित्यकार अनिर्वाचित विधायक होता है : डा मृदुला सिन्हा . साहित्य सम्मेलन में प्रकाशनाथ मिश्र के काव्य-संग्रह ‘हे राम ! तुम कब आओगे?’ का हुआ लोकार्पण, डॉ अनिल सुलभ और पुर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने किया
कौशलेन्द्र पाण्डेय पटना, २८ नवम्बर। प्रत्येक साहित्यकार समाज का अनिर्वाचित विधायक होता है। वह समाज की विसंगतियों की पहचान कर,न केवल उसके प्रतिकार का स्वर देता है, बल्कि समस्याओं का समाधान भी समाज के विराट सदन में रखता है। साहित्य से यह अपेक्षा की जाती है…
विश्व दिव्यांग दिवस पर हेल्थ इंस्टिच्युट में आयोजित होगा ५ दिवसीय समारोह २ दिसम्बर को पहली बार लगेगा चिकित्सा-विज्ञान की पुस्तकों का पाँच दिवसीय मेला ,३ दिसम्बर को लगाया जाएगा निःशुल्क पुनर्वास शिविर, दी जाएगी तिपहिया साइकिल,चल-कुर्सी एवं श्रवण-यंत्र सहित सभी प्रकार की सहाय्य-सामग्रियाँ
पटना कौशलेन्द्र पांडेय, पटना, विश्व विकलांग दिवस पर, इस वर्ष भी इंडियन इंस्टिच्युट औफ़ हेल्थ एडुकेशन ऐंड रिसर्च, बेउर में, आगामी २ दिसम्बर से ६ दिसम्बर तक, पाँच दिवसीय समारोह आयोजित किया जा रहा है, जिसमें दिव्यांग जनों को तिपहिया…