पटना /अपने बच्चों को संस्कृत पढ़ा रहे हैं शिविर में संस्कृत बोलना -सीखने वाले, अध्यक्ष मानते हैं कि यह साहित्य सम्मेलन की बड़ी उपलब्धि /सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ स्वयं अपने पुत्र और पौत्रों को संस्कृत बोलना सिखा रहे हैं।
पटना, २५ मई। संस्कृत प्रेमियों के लिए यह एक प्रसन्नता की बात हो सकती है कि, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित ‘संस्कृत संभाषण शिविर’ के प्रतिभागीगण स्वयं तो संस्कृत बोलना सरल विधि से सीख ही रहे हैं, अपने घर के बच्चों को संस्कृत पढ़ा…
पटना /सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर साहित्य-सम्मेलन ने श्रद्धापूर्वक किया स्मरण, दी भावांजलि
पटना , २० मई। छायावाद-युग के प्रमुख स्तंभ और प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में सुख्यात हिन्दी के महान कवि पं सुमित्रानंदन पंत, प्रकृति के दिव्य सौंदर्य के चितेरे और मानवतावादी कवि थे। उनकी रचनाओं के विराट विस्तार में प्रकृति का चित्ताकर्षक चित्रण तो है…
पटना /देशभर के वरिष्ठ साहित्यकारों ने दिवंगत कवि पुरुषोत्तम नारायण को दी श्रद्धांजलि, अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति ने आयोजित की आँन लाइन स्मृति-सभा
पटना, १७ मई। अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्त्वावधान में रविवार की संध्या, दिवंगत कवि, सुप्रसिद्ध बाँसुरीवादक और संचारकर्मी पुरुषोत्तम नारायण सिंह की स्मृति में ऑनलाइन स्मृति सभा आयोजित की गई, जिसमें देश भर से जुड़े अनेक…
पटना /महाकवि काशीनाथ पाण्डेय जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई व्याख्यान प्रतियोगिता
पटना, ८ मार्च। हिन्दी काव्य साहित्य में सबसे लम्बी कविता लिखने वाले महाकवि काशीनाथ पाण्डेय अद्भुत काव्य-प्रतिभा संपन्न एक ऐसे प्रयोगधर्मी कवी थे, जिन्हें ‘अक्षर-पुरुष’ कहा जा सकता है। वे एक महान भाषाविद थे। उन्हें अक्षरों के भी अर्थ ज्ञात थे…
पटना ब्यूरो /हर अवस्था ( माता, पत्नी और कन्या ) में मातृ-स्वरूपा नारी-शक्ति को नमन है : डा अनिल सुलभ, अध्यक्ष -बिहार हिन्दी साहित्य सम्मलेन
कौशलेन्द्र पाराशर की रिपोर्ट /विधाता ब्रह्मा ने अपनी सुख-निद्रा में जो साँसें छोड़ीं उनसे नारी की उत्पत्ति हुई है ! यदि संसार में विधाता की यह कृति न होती, तो संसार में होता ही क्या? संसार को अपनी जिस रम्य और वंद्य ईश्वरीय उपहार पर गौरव करना चाहिए, उसकी…
पटना /अद्भुत क़िस्सा-गो थे फणीश्वरनाथ रेणु, मन को मोहती है उनकी भाषा और शैली -डॉ. अनिल सुलभ, साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ जन्म शताब्दी समारोह
अद्भुत क़िस्सा-गो थे फणीश्वरनाथ रेणु, मन को मोहती है उनकी भाषा और शैली, साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ जन्म शताब्दी समारोह,कवि बाबूलाल मधुकर का खंड-काव्य ‘मगही मेघदूत’ तथा डा मेहता नगेंद्र की पुस्तक ‘बेलपत्र’ का हुआ लोकार्पण,रेणु…
पटना ब्यूरो /महाकवि पं जगन्नाथ मिश्र गौड़ ‘कमल’ का साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ जयंती समारोह एवं कवि-सम्मेलन
पटना, १ मार्च। महाकवि पं जगन्नाथ मिश्र गौड़ ‘कमल’ हिन्दी-काव्य के अत्यंत मनोहारी काल ‘छायवाद’ के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कवि के रूप में समादृत हैं। उनकी विश्रुत काव्य-कृति ‘प्रकृत-पुरुष’ उस युग की प्रतिनिधि रचना मानी…
पटना ब्यूरो /एक महान चिकित्सक तथा जीवन मूल्यों के स्तुत्य कवि थे डा रंगी प्रसाद ‘रंगम’ जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन
संजय राय की रिपोर्ट /पटना – अपने समय के लोकप्रिय कैंसर रोग-विशेषज्ञ और साहित्यकार डा रंगी प्रसाद सिंह ‘रंगम’ एक महान चिकित्सक ही नहीं,जीवन-मूल्यों के अत्यंत मूल्यवान कवि भी थे। इनकी रचनाओं में जीवन का राग और समाज की पीड़ा को अभिव्यक्ति…
पटना ब्यूरो /अद्भुत सामर्थ्य के आलोचक थे आचार्य नलिन विलोचन शर्मा जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, १८ फ़रवरी। हिन्दी के आलोचना-साहित्य में अतुल्य अवदान देनेवाले तथा काव्य में ‘प्रपद्य-वाद’ के प्रवर्त्तक आचार्य नलिन विलोचन शर्मा की लेखनी में अद्भुत सामर्थ्य था। उनकी लेखनी ने फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ समेत अनेक हिन्दी-सेवियों का…
पटना ब्यूरो /”मनीषी विद्वान आचार्य नलिन विलोचन शर्मा” की जयंती पर डॉ. अनिल सुलभ ने अपने कलम से श्रद्धांजलि दी, आज “बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन” में उनकी जयंती पर कार्यक्रम
कौशलेन्द्र पाराशर की रिपोर्ट / मात्र ४५ वर्ष की आयु में आलोचना-साहित्य के मानदंड स्थापित कर, अपनी मेधा और साहित्यिक-प्रतिभा से देश भर के विद्वानों को चमत्कृत कर देने वाले मनीषी विद्वान आचार्य नलिन विलोचन शर्मा एक ऐसे समालोचक हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से…
बिहार ब्यूरो /बिहार के द्विवेदी’ थे अभिनव गद्य के प्रवर्त्तक आचार्य रामलोचन शरण साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ जयंती-समारोह, आयोजित हुई बाल-कथा एवं लघु-कथा गोष्ठी
पटना, ११ फरबरी। हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन में अप्रतिम अवदान देनेवाले मनीषी विद्वान, प्रकाशक और संपादक आचार्य रामलोचन शरण ‘बिहारी’, खड़ी बोली के अभिनव गद्य शैली के प्रवर्तक माने जाते हैं। आचार्य शिवपूजन सहाय ने उन्हें ‘बिहार का…
पटना ब्यूरो /स्मृति-शेष ‘बिहार के द्विवेदी’ थे अभिनव गद्य शैली के प्रवर्तक आचार्य रामलोचन शरण जयंती (११ फरवरी) पर विशेष- डा अनिल सुलभ
स्मृति-शेष बिहार के द्विवेदी’ थे अभिनव गद्य शैली के प्रवर्तक आचार्य रामलोचन शरण जयंती (११ फरवरी) पर.अपनी विशिष्ट गद्यशैली तथा हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन में अप्रतिम अवदानों के लिए श्रद्धास्पद रहे मनीषी विद्वान और हिन्दी के प्रथम व्याकरण समेत…