पटना ब्यूरो /लखनऊ के वरिष्ठ कवि डा शैलेश पण्डित का हुआ एकल काव्य-पाठ, किए गए सम्मानित
पटना, ११ सितम्बर। “बहुत बोलता है मेरे घर का हीरामन/ भिश्ती की सुनकर राजा को गरियाता है/ जिस दिन से बँट गया घर का चौका-चूल्हा/ वह कबीर बाबा की बानी में गाता है”—– “जिस दिन हम गाँव से मुलुक हुए/ उस दिन से रूठ गया मुँह बोला…
पटना /हिन्दी के महाकवि थे ‘मोहन प्रेमयोगी’, आचार्य रामचंद्र शुक्ल से धन्य हुई हिन्दी,साहित्य सम्मेलन में मनायी गई जयंती
पटना, ४ अक्टूबर। महाकाव्य ‘महाशक्ति’, ‘मेनका’, ‘रास-रचैया’ और ‘जागरी वसुंधरा’ जैसी कालजयी कृतियों के रचनाकार ब्रजनंदन सहाय ‘मोहन प्रेमयोगी’ हिन्दी-साहित्य के एक ऐसे विनम्र महाकवि हैं,जिन्होंने…
पटना /भव्य कवि सम्मेलन के साथ हुआ बहुराष्ट्रीय पत्रिका “प्रज्ञान विश्वम” का लोकार्पण
पटना, २९ सितम्बर। अखिल भारतीय सर्व भाषा समन्वय समिति के तत्वावधान में नगर के एग्जीबिशन रोड स्थित आध्यात्मिक सत्संग समिति के सभागार में विश्व स्तरीय पत्रिका “प्रज्ञान विश्वम” का लोकार्पण हुआ। पटना के वरिष्ठ साहित्यकार डाक्टर रत्नेश्वर सिंह के व्यक्तित्व…
पटना /सम्मेलन भवन के निर्माण में राजा बहादुर कीर्त्यानंद सिंह का था सर्वोत्तम योगदान,जयंती पर साहित्य सम्मेलन में पुस्तक ‘श्रीकांत व्यास के अनमोल वचन’ का हुआ लोकार्पण
पटना, २८ सितम्बर । कला, संगीत और साहित्य के संरक्षण और पोषण में बिहार के जिन राज-घरानों के नाम आदर से लिए जाते हैं, उनमें बनैली-राज का नाम विशेष उल्लेखनीय है। अपेक्षाकृत बहुत छोटा होकर भी बनैली ने इन सारस्वत प्रवृतियों के संरक्षण और पोषण में जो कार्य…
पटना /19 अक्टूबर को मनाया जाएगा साहित्य सम्मेलन का 105वाँ स्थापना दिवस समारोह,महामहिम को दिया जाएगा आमंत्रण
पटना, 19सितम्बर। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का 105वाँ स्थापना दिवस समारोह आगामी 19अक्टूबर को आहूत किया जाएगा। इस अवसर पर सम्मेलन द्वारा दी जाने वाली सर्वोच्च मानद उपाधि ‘विद्या वाचस्पति’ और ‘विद्या वारिधि’ के साथ…
पटना /सभी भारत वासी हिन्दी को राष्ट्रीय भावना के साथ अपनाएँ: पूर्व राज्यपाल,’हिन्दी पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ का हुआ समापन
पटना, १५ सितम्बर। भारत की राष्ट्र-भाषा’ शीघ्र घोषित हो, इस हेतु जन-अभियान चलाने के संकल्प के साथ, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्त्वावधान में, गत १ सितम्बर से आयोजित ‘हिन्दी-पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ का शुक्रवार को समापन हो गया।…
पटना /हिन्दी दिवस पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ समारोह,परिषद के सभापति देवेश चंद्र ठाकुर ने १४ हिन्दी-सेवियों को किया सम्मानित
पटना, १४ सितम्बर। हिन्दी भारत की सबसे लोकप्रिय भाषा है। वह दिन दूर नहीं जब यह अपनी वैज्ञानिकता और सरसता के कारण हर जिह्वा पर छा जाएगी। पूरी दुनिया में इसकी गूंज होगी, जिस पर प्रत्येक भारत-वासी को गौरव होगा। शीघ्र ही यह देश की ‘राष्ट्र-भाषा’…
पटना /व्याख्यान में सभा के अध्यक्ष ही प्रथम संबोध्य, उच्चारण और भाषा हो सुस्पष्ट,साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई ‘संभाषण-कार्यशाला
पटना, १३ सितम्बर। सभाओं में यह प्रायः ही देखा जाता है कि व्याख्यान देने वाले वक्ता, किसे और कैसे संबोधन करें यह भी नहीं जानते। सौ में निन्यानवे वक्ताओं को, व्याख्यान का व्याकरण नहीं पता होता। किसी भी सभा में व्याख्यान का आरंभ करते हुए, वक्ताओं को सब से…
पटना /साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई स्वरचित काव्य-पाठ प्रतियोगिता-छात्र-कवियों और कवयित्रियों ने सुनाई एक से बढ़कर एक कविताएँ, १५ सितम्बर को होंगे पुरस्कृत
पटना, १२ सितम्बर । बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में लगाए गए ‘पुस्तक-चौदस-मेला’ और हिन्दी सप्ताह के १२वें दिन, मंगलवार को, विद्यार्थियों के लिए स्वरचित काव्य-पाठ प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने एक…
पटना /हिन्दी पखवारा के ११वें दिन साहित्य सम्मेलन में मनायी गयी जयंती, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी
पटना, ११सितम्बर। ‘कर्ण’ और ‘कैकेयी’ जैसे अमर प्रबंध-काव्यों के महान रचयिता महाकवि केदार नाथ मिश्र ‘प्रभात’ हिन्दी काव्य-साहित्य के एक ऐसे अनमोल रत्न हैं, जो अपने जीवन काल में ही भारत-वर्ष के अनेक साहित्यकारों के…
पटना /सम्राट राजा राधिका रमण प्रसाद सिंह की जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई ‘कथा-कार्यशाला
पटना ब्यूरो , १० सितम्बर। कथा में रोचकता और उद्देश्य की गम्भीरता आवश्यक है। कहानी का एक उद्देश्य पाठकों के मन का रंजन तो है, पर यही एक मात्र उद्देश्य नहीं, अपितु जिससे लोक-मंगल हो, समाज में गुणात्मक परिवर्तन हो, पाठकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े, यह है।…
पटना /हिन्दी काव्य-साहित्य में तुलसी के बाद भारतेन्दु ही लोकनायक-जयंती पर आयोजित हुई लघुकथा-गोष्ठी,’वैदिक विभूतियों का सान्निध्य’ का हुआ लोकार्पण
पटना, ९ सितम्बर। हिन्दी के काव्य-साहित्य में, महाकवि तुलसी दास के पश्चात लोक-जागरण के लिए जिसे ‘लोक-नायक’ कहा जा सकता है, उस महान साहित्यकार का नाम भारतेंदु हरिश्चन्द्र है। आधुनिक हिन्दी को, जिसे ‘खड़ी-बोली’ भी कहा गया, नया रूप…