लाकडाउन /पटना /पं छविनाथ पाण्डेय एक महान स्वतंत्रता सेनानी, तपोनिष्ठ दधीचि-तुल्य साहित्यकार, संपादक और एक ऐसे विशाल वट-वृक्ष थे, आज उनकी जयंती है। इस वर्ष हम उनकी जयंती सम्मेलन-सभागार में नही मना पा रहे हैं:डॉ अनिल सुलभ
पं छविनाथ पाण्डेय एक महान स्वतंत्रता सेनानी, तपोनिष्ठ दधीचि-तुल्य साहित्यकार, संपादक और एक ऐसे विशाल वट-वृक्ष थे, जिनकी छाँव तले वैसे साहित्यकारों को भी प्राण और नवजीवन मिले, जिनके हृदय उपवन निष्प्राण सूखे वृक्षों के वन बन गए थे! आज उनकी जयंती है। इस…
बिहारवासियों को राम नवमी की हार्दिक बधाई! अनंत शुभकामनाएँ: डा अनिल सुलभ, अध्यक्ष -साहित्य सम्मलेन बिहार, पटना
शील, सौंदर्य, पराक्रम, पुरुषार्थ, त्याग और बलिदान के आदर्श मर्यादा-पुरुषोत्तम श्री राम, जिनसे सम्पूर्ण भारतीय समाज सदियों से अनुप्राणित होता रहा है, हज़ारों वर्ष पूर्व आज ही जगत कल्याण हेतु इस पावन धारा पर अवतरित हुए थे! उनका सम्पूर्ण जीवन , मानव-जाति के…
पटना /साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष के घर पर भी दिया गया अस्ताचल भास्कर को अर्घ्य। विश्व-मानवता की रक्षा के लिए की गई प्रार्थना
३० मार्च। सूर्योंपासना का अत्यंत महनीय पर्व सूर्य–सष्टि व्रत, जिसे लोक–आस्था का दिव्य महापर्व भी माना जाता है, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ के घर भी मनाया जाता है। उनकी धर्म–पारायण पत्नी किरण झा, वर्षों से यह…
‘कोरोना’ के विरुद्ध महाभारत के पाँच वे दिन ! डॉ अनिल सुलभ
पटना /बड़े दिनों के बाद विश्राम के इतने लम्बे दिन मिले हैं। यों तो ‘कोरोना‘ ने पूरे विश्व में कोहराम मचा दिया है, अबतक बीस हज़ार से अधिक लोग काल के गाल में समा गए हैं, चार लाख से अधिक लोग इस क्षुद्र जीवाणु से ग्रस्त हो चुके हैं, मुझे वर्षों…
यदि १५ दिन भी शतप्रतिशत पाबन्दी सुनिश्चित हो गई तो मेरा विश्वास है कि संसार से कोरोना का नाश हो जाएगा : डा अनिल सुलभ
कौशलेन्द्र पाण्डेय, खाद्य-सामग्रियों के लिए दुकानों पर बढ़ रही भीड़ ‘आपस में दूरी बनाए रखने’ के उद्देश्य के विपरित सिद्ध हो रही है! इससे बचने-बचाने के लिए सरकार को चाहिए कि वह प्रत्येक घर में आवश्यक खाद्यान्न एवं फल-शब्जियाँ निर्धारित शुल्क पर पहुँचाया…
डॉ अनिल सुलभ की पुरे विश्व की जनता से अपील /संसार इस त्रासदी से बच जाएगा! कृपया इस विचार को सर्वत्र फैलाएँ:
कौशलेन्द्र पाण्डेय, संवाददाता. प्रत्येक जन्म लेने वाला, एक न एक दिन मृत्यु को प्राप्त होता है! किसी किसी की मृत्यु भी आदरणीय हो जाती है तो किसी की घृणास्पद भी! ‘करोना’ की मौत , ‘कुत्ते की मौत’ की तरह है! शव-यात्रा के लिए तो क्या ‘कंधा देने’ के लिए भी चार…