पटना /इस शहर में अब लाश और गिद्ध है बाक़ी — सुमित्रानन्दन पंत की जयंती पर साहित्य-सम्मेलन में आयोजित हुई कवि-गोष्ठी
पटना, २० मई। “उठ गए हैं वो लोग जो रहे कभी ज़िंदा/ इस शहर में अब लाश और गिद्ध है बाक़ी”— प्रकृति के दोहन, स्वार्थ में अंधी हुई दुनिया और भीषण रक्त-पात ने सभ्य कहे जाने वाले समाज को क्या बना दिया है, इसकी ओर इंगिति करने वाली इन पंक्तियों…
पटना /साहित्य सम्मेलन में कवयित्री माधुरी भट्ट की दो पुस्तकों ‘काव्य-दर्शनी सोबती वल्लभ’ तथा ‘पूरब की ओर’ का हुआ लोकार्पण
प्रिया सिन्हा पटना से , २७ अप्रैल। समाज की चिता को प्राथमिकता में रखनेवाली विदुषी साहित्यकार और समाजसेविका माधुरी भट्ट आध्यात्मिक चेतना और मंगलभाव की कवयित्री हैं। युवाओं में भटकाव, संस्कार हीनता, स्त्रियों और कमज़ोरों का उत्पीड़न, अत्याचार, मानव जाती का…
पटना /महाकवि काशीनाथ पाण्डेय हस्तांतरणीय स्मृतिका कुलपति को की भेंट, साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित हुई थी स्मृति व्याख्यान, गायन एवं काव्य-पाठ प्रतियोगिता
पटना, १९ अप्रैल। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा, महाकवि काशीनाथ पाण्डेय की स्मृति में आयोजित अंतर्विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में सर्वाधिक पुरस्कार अर्जित करने के कारण ‘सकल विजेता हस्तांतरणीय स्मृतिका’ पर अधिकार जमाने वाले पाटलिपुत्र…
पटना /तीर्थंकर महावीर ने मनुष्यों को उनके सद्गुणों से परिचित कराया तो अम्बेडकर ने शिक्षा और समन्वय से- प्रबुद्ध हिंदू समाज ने आयोजित किया जयंती समारोह
पटना, १८ अप्रैल। जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने बर्बर होते जा रहे मानव-समुडाय को उसके सद्गुणों से परिचित कराया। यह बताया कि प्रेम और अहिंसा का मार्ग ही मनुष्यता का मार्ग हो सकता है। समस्त प्राणी-मात्र से प्रेम और करुणा का भाव रखकर ही हम…
पटना /रवीन्द्र किशोर सिन्हा को दिया गया ‘साहित्य सम्मेलन संरक्षक शिरोमणि’ सम्मान,४१वें महाधिवेशन की सफलता पर आयोजित हुआ आनंदोत्सव-सह-सम्मान समारोह
पटना, १७ अप्रैल। तपते दिन में भी बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन आज आनंद की गंगा में डुबकी लगा रहा था। अध्यक्ष समेत सम्मेलन के सभी अधिकारी और सदस्यगण एक दूसरे को बधाइयाँ देते हुए, बधाइयाँ स्वीकार करते हुए अपनी प्रसन्नाता की अभिव्यक्ति कर रहे थे। रविवार को…
पटना /पं छविनाथ पांडेय ने साहित्य सम्मेलन को दीर्घ जीवी बनाया / जयंती पर श्रद्धा से याद किए गए सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी
पटना, १४ अप्रैल। यदि यशस्वी पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और साहित्यकार पं छविनाथ पाण्डेय न होते तो हिन्दी साहित्य सम्मेलन का अस्तित्व दशकों पूर्व समाप्त हो जाता। सन १९१९ में स्थापित सम्मेलन को १९३६ में पाण्डेय जी के ही महान उद्यम और प्रभाव से, सम्मेलन को…
पटना /अत्यंत प्रतिभाशाली कवयित्री और निबन्धकार थीं गिरिजा वर्णवाल/ जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना,११ अप्रैल। विदुषी साहित्यकार गिरिजा वर्णवाल एक अत्यंत प्रतिभाशाली कवयित्री और निबंधकार थीं। उनकी रचनाओं में उनकी प्रतिभा और विद्वता की स्पष्ट झलक मिलती है। उनकी विनम्रता और उनका आंतरिक सौंदर्य, उनके विचारों, व्यवहार और रचनाओं में अभिव्यक्त हुआ है।…
पटना /यात्रा-साहित्य के पितामह थे महापंडित राहुल सांकृत्यान- जयंती पर आयोजित हुई लघु-कथा गोष्ठी, युवा लेखका शीतल श्रीवास्तव की दो पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
पटना, ९ अप्रैल । अद्भुत ज्ञान-पिपासु और सदा-अतृप्त जिज्ञासु थे महापंडित राहुल सांकृत्यान। जगत और जगदीश को जानने की उनकी अकुलाहट बहुत भारी थी। वे संसार के सभी निगूढ़ रहस्यों को शीघ्र जान लेना चाहते थे। यही अकुंठ जिज्ञासा उन्हें जीवन-पर्यन्त बेचैन और…
पटना /भारत की “राष्ट्रभाषा हिन्दी” हो के “संकल्प” के साथ साहित्य सम्मेलन के ४१वें महाधिवेशन का हुआ समापन,डा वेद प्रताप वैदिक ने हिन्दी सेवी विदुषियों और विद्वानों का किया सम्मान
कौशलेन्द्र पाराशर पटना से । अब और कोई देर किए विना भारत की राष्ट्रभाषा हिन्दी घोषित हो। इस संकल्प के साथ बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय ४१वाँ महाधिवेशन रविवार को संपन्न हो गया। समारोह के मुख्य अतिथि और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ व…
पटना /हिन्दी-काव्य में ‘नकेन-वाद’ के स्तम्भ थे ‘केसरी’ साहित्य सम्मेलन में दोनों विभूतियों की जयंती पर नवोदित लेखिका ज्योति झा के कथा संग्रह ‘आनंदी’ का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुई लघुकथा-गोष्ठी
पटना, ३१ मार्च। पिछली पीढ़ी के वरेण्य कवि आचार्य मुरलीधर श्रीवास्तव शेखर एक बड़े कवि हीं नहीं, एक बड़े व्याकरण विद और महान भाषा-विज्ञानी थे। वे हिन्दी के देशज रूप को महत्त्वपूर्ण मानते थे। वे यह कहा करते थे कि, हिन्दी की उन्नति, सबसे अधिक वहाँ हुई, जहाँ…
पटना /साहित्य सम्मेलन में हुआ भव्य समारोह, कवियों ने दी विनम्र काव्यांजलि , अगले वर्ष से एक-एक लाख रूपए के दिए जाएँगे पुरस्कार
पटना, २७ मार्च। राष्ट्रभाषा परिषद के निदेशक सहित अनेक प्रशासनिक पदों पर अपनी मूल्यवान सेवाएँ देने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और साहित्यकार डा भगवती शरण मिश्र आधुनिक काल में हिन्दी के अग्र-पांक्तेय उपन्यासकार थे। ‘पीतांबरा’,…
पटना /साहित्य सम्मेलन के ४१वे महाधिवेशन में डा वेद प्रताप वैदिक ‘भारत की एक राष्ट्रभाषा’ पर देंगे व्याख्यान,स्वतंत्रता के ७५वें वर्ष एवं रेणु को समर्पित होगा अधिवेशन
पटना, २३ मार्च। देश के सुविख्यात पत्रकार और हिन्दी सेवी डा वेद प्रताप वैदिक आगामी २-३ अप्रैल को होनेवाले, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के ४१वें महाधिवेशन में भारत की राष्ट्र भाषा पर अपना व्याख्यान देंगे। अटल बिहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष…