पटना /साहित्य सम्मेलन में स्वर-कोकिला लता जी की स्मृति में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा, शताब्दी-समारोह में बुलाना चाहते थे : अनिल सुलभ
पटना, ७ फरवरी। “पत्थरों को भी रुला जाएंगी / उन्हें सदियाँ भुला न पाएँगी / सुरों की थीं उनमें महादेवी / लता जी सदा याद आएँगी”, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने अपनी इन्हीं पक्तियों के साथ, भारतीय संगीत की अप्रतिम तपस्विनी और सुरों की महादेवी…
पटना /साहित्य सम्मेलन में स्वर-कोकिला लता जी की स्मृति में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा, शताब्दी-समारोह में बुलाना चाहते थे : अनिल सुलभ
पटना, ७ फरवरी। “पत्थरों को भी रुला जाएंगी / उन्हें सदियाँ भुला न पाएँगी / सुरों की थीं उनमें महादेवी / लता जी सदा याद आएँगी”, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने अपनी इन्हीं पक्तियों के साथ, भारतीय संगीत की अप्रतिम तपस्विनी और सुरों की महादेवी…
पटना /गीत के शिखर-पुरुष थे जानकी,’निराला’ तो थे ही निराले, पं शिवदत्त मिश्र का साहित्यक अवदान महनीय- जयंती पर तीनों साहित्यिक विभूतियों को साहित्य सम्मेलन ने दिया तर्पण, ‘रोगोपचार योग केंद्र’ का हुआ उद्घाटन
पटना, ५ फरवरी। हिन्दी साहित्य के पुरोधा और गीत के शिखर-पुरुष थे आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री। वे बिहार के ही नही, हिन्दी साहित्य के विशाल आगार के गौरव-स्तम्भ हैं। हिन्दी के गीत-साहित्य की चर्चा, उनके विना सदा अधूरी रहेगी। छायावाद युग के चार स्तम्भों में…
पटना /साहित्य सम्मेलन में स्थापित होगा ‘रोगोपचार योग केंद्र’, वसंत पंचमी से परामर्श और प्रशिक्षण का आरंभ
पटना, २ फरवरी। उपचार की सभी पद्धतियों से निराश हो चुके सभी रोगियों को अब भारत की प्राचीन योग-पद्धति से बड़ी राहत मिलने वाली है। अब योग द्वारा असाध्य रोगों का उपचार किया जाएगा। आगामी ५ फरवरी (वसंत पंचमी) से बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में रोगोपचार योग…
पटना / हिन्दी के युग-प्रवर्त्तक साहित्यकार थे महाकवि जयशंकर प्रसाद जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन
पटना, ३० जनवरी। हिन्दी काव्य में जिन चार साहित्यिक-विभूतियों, जय शंकर प्रसाद, सुमित्रा नंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा को छायावाद-काल का स्तम्भ कहा जाता है, उनमें महाकवि जय शंकर प्रसाद प्रमुख हैं। वे एक युग-प्रवर्त्तक…
पटना /साहित्य सम्मेलन ने दी काव्य-श्रद्धांजलि, सम्मेलन दिन-पत्री का हुआ लोकार्पण
पटना, २८ जनवरी। कथा-साहित्य और काव्य-लालित्य के लिए सुविख्यात साहित्यकार पं प्रफुल्ल चंद्र ओझा ‘मुक्त’ अपने समय के अत्यंत महत्त्वपूर्ण साहित्यिक-हस्ताक्षर थे। साहित्य की सभी विधाओं में उन्होंने अधिकार पूर्वक लिखा। उनकी भाषा बहुत हीं प्रांजल…
पटना /साहित्य सम्मेलन के ४१वें महाधिवेशन की तिथि बढ़ाई गई- अब २-३ अप्रैल को आयोजित होगा दो दिवसीय साहित्यिक कुम्भ, सरस्वती पुत्रों का होगा सम्मान
पटना, २७ जनवरी। आगामी १२-१३ फरवरी को आहूत होने वाला बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का ४१वाँ महाधिवेशन अब २-३ अप्रैल को आयोजित होगा। कोबिड-१९ के नए रूप के प्रसार के कारण, राज्य सरकार के निर्देशों और इस कारण तैयारियों में आई बाधाओं को ध्यान में रखते हुए यह…
पटना /साहित्य सम्मेलन में बन रहा है मेजर बलबीर सिंह ‘भसीन’ स्मृति सभाकक्ष- आगामी महाधिवेशन के पूर्व होगा वातानुकूलित सभागार का लोकार्पण
पटना, २० जनवरी। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के ऊपरी तल पर एक वातानुकूलित नए सभाकक्ष का निर्माण किया जा रहा है। यह सभाकक्ष मगध विश्व विद्यालय के पूर्व कुलपति और सुख्यात कवि-कथाकार मेजर (डा) बलबीर सिंह ‘भसीन’ की स्मृति को समर्पित होगा। इस…
पटना /साहित्य और राजनीति के आदर्श व्यक्तित्व थे डा लक्ष्मी नारायण ‘सुधांशु’ जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ समारोह, डा सुषमा कुमारी की पुस्तक का हुआ लोकार्पण
पटना, १८ जनवरी। हिन्दी भाषा के उन्नयन में भारत के जिन महापुरुषों ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनमें एक महान नाम डा लक्ष्मी नारायण सिंह ‘सुधांशु’ जी का भी है, जो बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी थे और बिहार विधान सभा के भी…
नेपाल में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की हुई स्थापना नेपाली और हिन्दी के वयोवृद्ध साहित्यकार डा रामदयाल ‘राकेश’ बनाए गए अध्यक्ष
काठमाण्डू/ पटना, १६ जनवरी। मकर संक्रांति के दिन गत शनिवार को, नेपाल में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना की गई। काठमाण्डू के शांति नगर स्थित तृप्ति साधना सभागार में, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ की अध्यक्षता में, नगर के…
पटना /विश्व हिन्दी दिवस पर साहित्य सम्मेलन में की गई चिंता, ‘देश की राष्ट्र-भाषा’ घोषित करने की हुई मांग
प्रियंका भारद्वाज की रिपोर्ट , १० जनवरी/हिन्दी एक सरस, मधुर और वैज्ञानिक भाषा है। यह अपने गुणों और विज्ञान-सम्मत स्वरूप के कारण पूरे विश्व में विस्तृत हो रही है। किंतु पीड़ा और लज्जा का विषय है कि यह अपने ही देश में उपेक्षित है। जिसे देश की राष्ट्रभाषा…
पटना ब्यूरो /स्तुत्य है बाल-साहित्य में रेखा भारती मिश्र का योगदान भारती के तीन काव्य-संग्रहों का हुआ लोकार्पण, जयंती पर याद किए गए शाद अजीमाबादी
पटना, ८ जनवरी। बाल-साहित्य में हिन्दी के लेखकों की स्याही निरंतर कम होती जा रही है। हिन्दी में इसे एक बड़े अभाव के रूप में देखा जा रहा है। बहुत थोड़े से रचनाकार इस दिशा में कुछ पग बढ़ाते दिख रहे हैं। ऐसे में विदुषी कवयित्री रेखा भारती मिश्र की चेष्टाएँ…