पटना डेस्क /१० जनवरी,२०२१ को अपराह्न २ बजे बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, क़दमकुआँ, पटना में पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान-समारोह आयोजित है, जिसका उद्घाटन बिहार की उपमुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी करेंगी-डॉ. अनिल सुलभ
विश्व हिन्दी दिवस पर आगामी १० जनवरी,२०२१ को अपराह्न २ बजे बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, क़दमकुआँ, पटना में पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान-समारोह आयोजित है, जिसका उद्घाटन बिहार की उपमुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी करेंगी। उपरोक्त जानकारी बिहार हिंदी साहित्य…
पटना ब्यूरो /सच्चिदानंद समर्पित कवि थे जयंती पर दिया गया सांगितिक तर्पण, दो पुस्तकों का हुआ लोकार्पण
पटना, ६ जनवरी। शास्त्रीय नृत्य के महान आचार्य और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पूर्व कलामंत्री डा नगेंद्र प्रसाद ‘मोहिनी’ का संपूर्ण व्यक्तित्व ही मोहक था। वे कला और संगीत के मूर्तमान रूप थे। वे एक ऐसे नृत्यर्षि थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण…
पटना ब्यूरो /साहित्यकार वल्लभदेव तिवारी के पुण्य-स्मृति समारोह में ‘काव्य-दर्शनी’ का हुआ लोकार्पण
पटना, ४ जनवरी। कवयित्री माधुरी भट्ट की कविताएँ स्त्री-विमर्श को नवीन धरातल प्रदान करती हैं। स्त्री-मन की व्यथा और आकांक्षाओं की सहज अभिव्यक्ति इनकी रचनाओं में मिलती हैं। शोषण के विरुद्ध पूरी दृढ़ता से खड़ी इनकी कविताएँ बदल रहे आधुनिक समाज में स्त्रियों…
पटना ब्यूरो /ऋषि-तुल्य भक्तकवि थे डा नरेश पाण्डेय चकोर जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन , हरिद्वार मस्ताना को दिया गया स्मृति सम्मान
पटना, २ जनवरी। अंगिका भाषा और साहित्य के लिए अपना संपूर्ण जीवन न्योक्षावर करने वाले कवि डा नरेश पाण्डेय ‘चकोर’ कोमल भावनाओं से युक्त एक ऋषि-तुल्य भक्त कवि और साहित्यकार थे। अंगिका में उनका प्राण बसता था। डेढ़ सौ से अधिक छोटी-बड़ी पुस्तकों से…
पटना ब्यूरो /साहित्यकार और देश के प्रथम हृदयरोग विशेषज्ञ थे डा श्रीनिवास साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ १०१वाँ जयंती-समारोह, स्मृति-ग्रंथ का हुआ लोकार्पण
पटना, ३० दिसम्बर। भारत के प्रथम हृदय-रोग विशेषज्ञ और ‘इंदिरा गांधी हृदय-रोग संस्थान, पटना’ के संस्थापक-निदेशक डा श्रीनिवास एक महान हृदय-रोग-विशेषज्ञ और चिकित्सक होने के साथ-साथ, महान आध्यात्मिक चिंतक, साधक और साहित्यकार थे। उन्होंने अपना…
पटना ब्यूरो /डॉ. अनिल सुलभ के कलम से :स्मृतियाँ जिनकी रुलाती हैं राजनीति की धूप में साहित्य की घनी छांव थे डा शंकर दयाल सिंह जयंती (२७ दिसम्बर ) पर विशेष
स्मृतियाँ जिनकी रुलाती हैं राजनीति की धूप में साहित्य की घनी छांव थे डा शंकर दयाल सिंह, जयंती (२७ दिसम्बर ) पर विशेष.अपनी ज़िंदादिली और उन्मुक्त ठहाकों के लिए चर्चित रहे, अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय साहित्यिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व डा शंकर दयाल सिंह,…
पटना ब्यूरो /महामना मालवीय, अटल जी के व्यक्तित्व को साहित्य ने संवारा था साहित्य सम्मेलन में भारत के इन दोनों रत्नों के साथ डा उषा रानी दीन की मनाई गई जयंती, दी गई काव्यांजलि
पटना, २५ दिसम्बर । भारतीय आत्मा की जीवंत मूर्ति थे मालवीय जी। हिन्दी और भारतीय संस्कृति की शिक्षा के लिए दिया गया उनका अवदान कभी भुलाया नही जा सकता। वे संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेज़ी के विश्रुत विद्वान हीं नही अद्भुत वक़्ता भी थे। विद्वता, विनम्रता,…
पटना ब्यूरो /स्मृतियाँ जिनकी रुलाती हैं राजनीति की धूप में साहित्य की छांव थे डा शंकर दयाल सिंह जयंती (२७ दिसम्बर ) पर विशेष
स्मृतियाँ जिनकी रुलाती हैं राजनीति की धूप में साहित्य की छांव थे डा शंकर दयाल सिंह, जयंती (२७ दिसम्बर ) पर विशेष.अपनी ज़िंदादिली और उन्मुक्त अट्टाहास के लिए चर्चित रहे, अपने समय के अत्यंत लोकप्रिय साहित्यिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व डा शंकर दयाल सिंह,…
पटना ब्यूरो /डा परमानंद पाण्डेय १०९वीं जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने किया श्रद्धापूर्वक स्मरण, कवियों ने दी काव्यांजलि
पटना, १९ दिसम्बर। अंग-कोकिल डा परमानंद पाण्डेय बिहार की एक ऐसी साहित्यिक विभूति थे, जिनके नाम के स्मरण मात्र से मन को, किसी तपस्वी-महात्मा के सान्निध्य की पावन अनुभूति होती है। विद्वता, वाणी, रूप, रंग, गुण और व्यवहार में देवोपम व्यक्तित्व रखने वाले…
पटना ब्यूरो /डॉ. अनिल सुलभ के कलम से, स्मृति-शेष ‘अंगिका’ के दधीचि थे अंग-कोकिल डा परमानंद पाण्डेय जयंती (१९ दिसम्बर,२०२०) पर विशेष
अंगिका’ के दधीचि थे अंग-कोकिल डा परमानंद पाण्डेय. जयंती (१९ दिसम्बर,२०२०) पर विशेष.अंग-कोकिल डा परमानंद पाण्डेय बिहार की एक ऐसी साहित्यिक विभूति थे, जिनके नाम के स्मरण मात्र से मन को, किसी तपस्वी-महात्मा के सान्निध्य की पावन अनुभूति होती है।…
पटना ब्यूरो /साहित्य सम्मेलन में देश के ३९ रचनाकारों के साझा काव्य-संग्रह ‘रश्मि अनन्त’ का हुआ लोकार्पण
पटना, १३ दिसम्बर। साझा संग्रहों के प्रकाशन से हिन्दी काव्य-जगत में एक उत्साहप्रद स्फुरण आया है। ऐसे प्रकाशनों ने काव्य-संसार में प्रवेश को उत्सुक नव-कवियों और कवयित्रियों के लिए व्यापक मंच और अवसर सृजित किए हैं। उन कवियों और कवयित्रियों के लिए यह संजीवनी…
पटना ब्यूरो /सुंदर समाज का सपना देखनेवाले ‘लालधुआँ’ तिल तिल कर जलते रहे पुण्य-स्मृति-दिवस पर साहित्य सम्मेलन ने दी काव्यांजलि , अनामिका को स्मृति सम्मान
पटना, ९ दिसम्बर। अंग्रेज़ी फ़ौज की नौकरी छोड़कर सवतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े, अपने समय के अत्यंत चर्चित और अक्खड़ कवि आचार्य रामप्रिय मिश्र ‘लालधुआँ’, एक विद्रोही कवी थे। वे सुंदर समाज का सपना देखने आले एक ऐसे कवि थे, जिन्होंने एक डरावना…