पटना/मोहक व्यक्तित्ववाले महान नृत्य-ऋषि थे डा मोहिनी- जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ जयंती समारोह, दी गई काव्यांजलि
पटना, ६ जनवरी। नृत्य के ऋषि आचार्य थे डा नगेंद्र प्रसाद ‘मोहिनी’। नई पीढ़ी को नृत्य में प्रशिक्षित करने तथा नृत्य-साहित्य के लेखन में उनका महान अवदान है। उनका संपूर्ण व्यक्तित्व मोहक था। वे तन, मन और विचारों से भी सुंदर और गुणी कलाकार तथा…
बिहार: पूर्वी चंपारण के नये एसपी डॉ कुमार आशीष ने संभाला पदभार, बदमाशों को दी सख्त चेतावनी
पूर्वी चंपारण, निखिल दुबे : मोतिहारी के नये एसपी डॉ कुमार आशीष ने मंगलवार को कार्यभार संभाल लिया है। पुलिस अधीक्षक ने कार्यभार संभालने के तुरंत बाद सबसे पहले जिले के टॉप बदमाशों को चिह्रित किया है। एसपी ने बताया जिले के टॉप बदमाशों को को मांद से खींचकर…
पटना /अंगिका और हिन्दी के साधु कवि थे डा नरेश पाण्डेय ‘चकोर’ जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, ३ जनवरी। अंगिका भाषा और साहित्य के लिए अपना संपूर्ण जीवन न्योक्षावर करने वाले कवि डा नरेश पाण्डेय ‘चकोर’ कोमल भावनाओं से युक्त एक ऋषि-तुल्य भक्त कवि और साधु साहित्यकार थे। अंगिका में उनका प्राण बसता था। डेढ़ सौ से अधिक छोटी-बड़ी…
पटना/राजनीति की कड़ी धूप में साहित्य की घनी छांव थे शंकर ८५वीं जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ समारोह , दी गई काव्यांजलि
पटना, २७ दिसम्बर। अपने मुक्त ठहाके के लिए चर्चित रहे अद्भुत प्रतिभा के मंच संचालक और स्तुत्य साहित्यकार डा शंकर दयाल सिंह राजनीति की तपती धूप में साहित्य की घनी छांव की तरह थे । भारत की ५वीं लोक-सभा के वे सबसे कम उम्र के सांसदों में से एक थे। अपने पहले…
पटना/साहित्य सम्मेलन की युवा साहित्यकार परिषद ने आयोजित किया युवा साहित्यकार महोत्सव, हुआ भव्य कवि सम्मेलन-सम्मानित किए गए युवासाहित्यकार
पटना, २६ दिसम्बर। बिहार के युवा साहित्यकार आशा के वो नवल कुसुम हैं, जिन पर हिन्दी साहित्य को बहुत आशाएँ हैं। इनकी ही उत्साहित ऊर्जा से साहित्य और समाज में गुणात्मक परिवर्तन होगा। युवाओं को दिखावे और नक़ल से बचते हुए, अपने भीतर की आत्मा के सौंदर्य को…
पटना /भारतीय आत्मा की जीवंत मूर्ति थे महामना पं मदन मोहन मालवीय,साहित्य से ऊर्जस्वित हुआ अटल जी का व्यक्तित्व- दोनों रत्नों के साथ डा उषा रानी ‘दीन’ की मनाई गई जयंती, दी गई काव्यांजलि
पटना, २५ दिसम्बर । भारतीय आत्मा की जीवंत मूर्ति थे मालवीय जी। हिन्दी और भारतीय संस्कृति की शिक्षा के लिए दिया गया उनका अवदान कभी भुलाया नही जा सकता। वे संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेज़ी के विश्रुत विद्वान हीं नही अद्भुत वक़्ता भी थे। विद्वता, विनम्रता,…
पटना /कलम के जादूगर ही नहीं अग्नि-पोषक साहित्यकार थे रामवृक्ष बेनीपुरी- जयंती पर साहित्य सम्मेलन आओजित हुआ समारोह, आयोजित हुई लघुकथा-गोष्ठी
पटना, २३ दिसम्बर। हिन्दी के गद्य-साहित्य में अनमोल अवदान देने वाले महान लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी ‘कलम के जादूगर’ ही नहीं, हृदय में अग्नि का पोषण कारने वाले साहित्यकार थे। क्रांति और विद्रोह की एक ज्वाला उनके हृदय में सदा धधकती रही। उनके भीतर जल…
पटना /साहित्य सम्मेलन में कवि अरुण कुमार श्रीवास्तव के काव्य-संग्रह ‘एक मुट्ठी सृजन’ का हुआ लोकार्पण
पटना, २० दिसम्बर । अंगिका भाषा और साहित्य के उद्धारकों में महाकवि परमानंद पाण्डेय का स्थान श्रेष्ठतम है। पाण्डेय जी ने इसे संजीवनी दी और उत्कर्ष तक पहुँचाया। इन्हें अंगिका का दधीचि साहित्यकार माना जाता है। उन्होंने अपने विपुल साहित्य-सृजन से, अंग प्रदेश…
पटना /साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ जन्मशताब्दी समारोह, डा रमण शांडिल्य को दिया गया स्मृति सम्मान
पटना, १८ दिसम्बर। हिन्दी के महान सपूतों में से एक महाकवि रामचंद्र जायसवाल अनेकों माहाकाव्यों के मनीषी सर्जक ही नहीं, एक बलिदानी स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिधर्मी महाकवि भी थे। उन्होंने हिन्दी साहित्य में प्रबंध-काव्य को नई ऊर्जा दी और…
पटना /साहित्यिक त्रैमासिकी ‘नया भाषा भारती संवाद’ के नए अंक का हुआ लोकार्पण
पटना,१६ दिसम्बर। एक संपादक को सभी प्रकार के पूर्वाग्रहों से मुक्त और लोक-मंगल की भावना से परिपूर्ण होना चाहिए। ऐसा ही संपादक समाचार, विचार, व्यक्ति और समाज के साथ न्याय कर सकता है। उसे पक्षपात से बचना और सत्य के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। पक्ष लेना और…
पटना /डा सत्यनारायण उपाध्याय की पुस्तक ‘सूर-साहित्य में ग्रामीण जीवन एवं संस्कृति’ का हुआ लोकार्पण, ‘छंद-विन्यास’ के कवि-लेखक डा संजीव कुमार चौधरी किए गए सम्मानित
पटना, १५ दिसम्बर। संत और भक्त कवि सूरदास के साहित्य में ग्रामीण जीवन और संस्कृति की मनोरम झलक मिलती है। विद्वान लेखक डा सत्यनारायण उपाध्याय ने सूर साहित्य से उद्धरण लेकर ग्राम्य-जीवन और संस्कृति के तत्कालीन इतिहास का सुंदर साक्ष्य प्रस्तुत किया है। यह…
पटना /पुस्तक ‘लेखकीय यात्रा के पड़ाव’ पर साहित्य सम्मेलन में हुई परिचर्चा, कवि विपिन विप्लवी का हुआ सम्मान
पटना, १० दिसम्बर । सुप्रसिद्ध सामाजिक चिंतक और मनीषी साहित्यसेवी विपिन विप्लवी की रचनाओं में समाज की स्पष्ट चिंता और परिवर्तन की अकुंठ आकांक्षा दिखाई देती है। लेखक समाज में हो रहे निरंतर नैतिक-ह्रास को रेखांकित करते हुए, उस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं।…