पटना /कविता की मूर्तमान संज्ञा थे पं वैद्यनाथ मिश्र ‘नागार्जुन’ जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने दी काव्यांजलि, डा सतीश राज पुष्कारणा को दी गई श्रद्धांजलि
पटना, ३० जून। नागार्जुन एक जीवंत कवि थे। बल्कि यह कहना चाहिए कि वे ‘कविता’ की ‘संज्ञा’ थे। यह उनको देख कर हीं समझा जा सकता था। संतकवि कबीर की तरह अखंड और फक्कड़! खादी की मोटी धोती और गंजीनुमा कुर्ता! वह भी मोटे खादी का। बेतरतीब…
पटना डेस्क /साहित्य सम्मेलन, कलाकक्ष और तरुमित्र के संयुक्त तत्त्वावधान में आरंभ हुआ ‘सांगितिक पावस शिविर’
पटना, १४ जून। संगीत का मानव मन पर सबसे गहरा प्रभाव पड़ता है। इसकी मधुर तरंगें, स्वर लहरियाँ ऋताओं के अंतर्मन में उतरती हैं और अवचेतन मन को अपने स्पंदन से बाँध कर उसे पुलकनकारी आनंद से विभोर कर देती हैं, जिसका एक बड़ा सुखद परिणाम होता है। मानव अपने सभी…
पटना /नही रहे वरिष्ठ साहित्यकार डा मधुकर गंगाधर साहित्य-समाज में शोक, सम्मेलन ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
पटना, ७ दिसम्बर। हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार तथा आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों के निदेशक रहे डा मधुकर का कल संध्या दिल्ली में निधन हो गया। ८ उपन्यासों, ८ कथा संग्रह, ४ कविता संग्रह, ३ संस्मरणों के संग्रह, ३ नाटक समेत ३० मूल्यवान ग्रंथों के यशस्वी लेखक डा…
पटना /शीघ्र ही देश की एक राष्ट्रभाषा घोषित हो, जो हिन्दी हो और लिपि देवनागरी साहित्य सम्मेलन के १०१वें स्थापना दिवस समारोह में, प्रस्ताव पारित कर की गई मांग
पटना /शीघ्र ही देश की एक राष्ट्रभाषा घोषित हो, जो हिन्दी हो और लिपि देवनागरी साहित्य सम्मेलन के १०१वें स्थापना देश की अपनी कोई राष्ट्रभाषा नही होती, वह देश कंठ में स्वर रख कर भी गूँगा होता है।उसकी कोई राष्ट्रीय अस्मिता नहीं होती और वहाँ कभी भावनात्मक…
पटना /कवियों की पतली आवाज़ दुनिया की अमर-आशा की आवाज़ है ६४ वर्ष पूर्व दिनकर ने कहा था, जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई संगोष्ठी और कवी-गोष्ठी
पटना, २३ सितम्बर। “चिंतकों और कवियों के वर्ष ‘शताब्दियों अथवा अर्द्ध-शताब्दियों में गिने जाते हैं। और, इसकी भी क्या चिंता कि स्थूल मनुष्य की ओर से पीटे जाने वाले भीषण पटह के विकराल रोर में हमारी पतली आवाज़ डूब जाती है? हमें इस विश्वास के साथ…
पटना /पुण्य स्मृति दिवस (३ सितम्बर) पर विशेष साहित्य सम्मेलन के प्रथम सभापति थे पं जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी – डा अनिल सुलभ
पुण्य स्मृति दिवस (३ सितम्बर) पर विशेष साहित्य सम्मेलन के प्रथम सभापति थे पं जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी डा अनिल सुलभ.खड़ी बोली हिन्दी की प्रथम पीढ़ी के महान कवियों और भाषाविदों में अग्रपांक्तेय साहित्यकार और ‘हास्य रसावतार’ के रूप में सुविख्यात…
पटना /74 वें आजादी के जश्न में साहित्य प्रेमी और बिहारवासी /बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, क़दमकुआं, पटना में, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने ध्वजारोहण किया
आजादी के जश्न में साहित्य प्रेमी और बिहारवासी डूब चुके है. हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉक्टर अनिल सुलभ ने सम्मेलन परिसर में झंडोत्तोलन किया। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार बहुत कम साहित्य प्रेमी झंडातोलन समारोह में पहुंचे। इस बार कोरोना के कारण…