पटना /सौ वर्ष पूरे करने वाले मैथिली और हिन्दी के एक मात्र साहित्यकार थे पं गोविन्द झा,निधन पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई शोक-सभा
पटना, २० अक्टूबर। मैथिली और हिन्दी के विलक्षण साहित्यकार और कोशकार पं गोविन्द झा एक ऐसे एकांतिक साधक थे, जिन्होंने न केवल अपनी आयु के सौ वर्ष पूरे किए, अपितु अपनी आयु के अनुकूल विपुल साहित्य का भी सृजन किया। उनके समान कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। उनका…
पटना /’एक राष्ट्र-एक राष्ट्र भाषा’ के लिए संघर्ष के संकल्प के साथ संपन्न हुआ साहित्य सम्मेलन का ४२वाँ महाधिवेशन,सम्मेलन की उच्च मानद उपाधि ‘विद्या-वाचस्पति’ से विभूषित हुये विधानसभा अध्यक्ष -अवध बिहारी चौधरी
पटना, ७ मई। ‘एक राष्ट्र और एक राष्ट्रभाषा’ के लिए संघर्ष के संकल्प के साथ बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय ४२वाँ महाधिवेशन भव्यता के साथ संपन्न हो गया। सृजन के नव-उत्साह, सम्मान और अलंकरण लेकर विदा हुए, प्रतिभागी…
पटना /छविनाथ पांडेय के प्रयास से साहित्य सम्मेलन को भूमि प्राप्त हुई, भवन बना-जयंती पर हास्य-वयंग्य के ख्यातिनाम कवि राजेश अरोरा ‘शलभ’ को दिया गया स्मृति-सम्मान
पटना, १५ अप्रैल। १९ अक्टूबर १९१९ को मुज़फ़्फ़रपुर में बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई थी। तबसे अगले १७ वर्षों तक यह संस्था उदारमना प्रबुद्धजनों के सहयोग से निःशुल्क अथवा किराए पर प्राप्त कमरों में चलती रही। वर्ष १९३६ में आहूत पूर्णिया अधिवेशन…
पटना /साहित्य सम्मेलन में स्मृति-व्याख्यान, काव्य-गायन के सफल प्रतिभागी छात्रों को किया गया पुरस्कृत, कलानेत्री डा पल्लवी विशास की पुस्तक ‘कथक-पल्लविनी’
पटना, ८ मार्च। महाकवि काशीनाथ पाण्डेय एक महान भाषा-विद और काव्य-साहित्य में अपने विलक्षण प्रयोगों से चमत्कृत कर देने वाले सच्चे अर्थों में ‘अक्षर-पुरुष’ थे। उन्हें अनेक भाषाओं के शब्दों के ही नही अक्षरों के भी अर्थ ज्ञात थे। अपनी रचनाओं में…
पटना /सम्मेलन के प्रतिनिधि-मण्डल के साथ राज्यपाल से मिले डा अनिल सुलभ,६ मई को सम्मेलन के ४२वें महाधिवेशन के उद्घाटन हेतु दिया आमंत्रण
पटना, २८ मार्च। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने एक प्रतिनिधि मण्डल के साथ मंगलवार की संध्या बिहार के महामहिम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से भेंट की तथा उन्हें आगामी ६-७ मई को आहूत, सम्मेलन के दो दिवसीय ४२वें महाधिवेशन के…
पटना /बाद मूद्दत के आए हैं वो,रिमझिम सावन आज भी है -महादेवी वर्मा जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवयित्री सम्मेलन
पटना, २६ मार्च। रविवार की संध्या साहित्य-सम्मेलन की कवयित्रियों के नाम रही, जब स्त्री-मन के विविध रूपों और उनके संवेगों को अभिव्यक्ति देने वाली विभिन्न भावों की कविताओं और गीत-ग़ज़लों का लम्बा दौर चला। सम्मेलन में हिन्दी काव्य में छायावाद-काल की प्रणम्य…
पटना /साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ बिहार दिवस समारोह, डा इंदुशेखर तत्पुरुष तथा डा विकास दवे को दिया गया स्मृति-सम्मान, भारत की सांस्कृतिक विरासत पर हुई संगोष्ठी
पटना, २५ मार्च। राज्य के रूप में बिहार की स्थापना के सूत्र-नायक थे मुक्त-छंद के पुरोधा कवि, पत्रकार और संपादक बाबू महेश नारायण। उनके ही हृदय में हुए, ‘बिहारी-सम्मान’ के महा-विस्फोट ने बिहार की स्थापना के लिए संघर्ष की चिनगारी और शक्ति प्रदान…
पटना /२९-३० अप्रैल को आयोजित होगा साहित्य सम्मेलन का ४२वाँ महाधिवेशन
पटना, ११ मार्च। इस वर्ष आहूत होने वाला बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन का दो दिवसीय ४२वाँ महाधिवेशन आगामी २९-३० अप्रैल को आयोजित होगा। बिहार के सभी ज़िलों से अधिकतम पाँच-पाँच प्रतिनिधि भाग ले सकेंगे। राज्य के साहित्यकारों के अतिरिक्त देश के अनेक मनीषी…
पटना /वर्धा में आयोजित ७४वें अधिवेशन में डा अनिल सुलभ के अनुरोध पर स्थायी समिति ने स्वीकृति दी
पटना, २७ फरवरी। प्रयाग हिन्दी साहित्य सम्मेलन का अमृत महोत्सव (७५वाँ) राष्ट्रीय अधिवेशन, अगले वर्ष के मार्च महीने में बिहार में आयोजित किया जाएगा। यह निर्णय सम्मेलन की स्थायी समिति ने विगत २५-२६ फरवरी को, महात्मा गांधी द्वारा १९३६ में…
पटना /साहित्य सम्मेलन में प्रो जनार्दन सिंह के भजन-संग्रह ‘साईं भक्ति कली प्रथम प्रसून’ का हुआ लोकार्पण,आयोजित हुआ भक्ति-काव्योत्सव
पटना, १६ फरवरी। स्वयं अथवा ईश्वर के निकट पहुँचने का सबसे सरल मार्ग है भक्ति। प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचता है, तब भक्ति का उदय होता है। प्रेम का गहरा सबंध विश्वास से है। आस्था उसी गहरे विश्वास की परिणति है। यह विश्वास ही भक्तों की इच्छाओं और…
पटना /साहित्य सम्मेलन में दो पुस्तकों ‘क्रौंच कृष्ण पक्षे’ तथा’मानस प्रिया बातें तेरी मेरी’ का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी
पटना, १४ फरवरी। विज्ञान के प्राध्यापक और हिन्दी के साहित्यकार प्रो रमेश पाठक के साहित्य में उनका वैज्ञानिक चिंतन अपनी पूरी महिमा के साथ लक्षित होता है। पाठकों को उनके पद्य में, काव्य-साहित्य में वर्णित ‘नौ-रसों’ में से अनेक रसों के अतिरिक्त…
पटना /साहित्य सम्मेलन में कहानी-संग्रह ‘पुल के नीचे’ का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुई लघुकथा गोष्ठी
पटना, ८ फरवरी। समाज के कठोर यथार्थ को, उसके उसी नंगे रूप में प्रस्तुत करती हैं बाँके बिहारी की कहानियाँ। उनकी कुछ कहानियाँ प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंदुलकर के बहुचर्चित नाटक ‘सखाराम बाइंडर’ की नायिका का स्मरण दिलाता है, जो पुरुषों के कमजोर नस…