पटना /साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ सावन-महोत्सव, हरित वसना कवयित्रियों ने गीतों से मोहा मन
पटना , ८ अगस्त। “आमंत्रण दृग से हुआ, लिए एक मनुहार/ हुए श्रावणी प्राण-धन, बरसी प्रीत-फुहार”– “मन चंचल हिरण बन बैठा, लगा कुलाँचे भरने/ अल्हड़ हो मदमस्त चली मैं, जैसे बहते झरने”– “जैसे-जैसे नीलाभ का तन हुआ सांवला/ वैसे-वैसे…