आचार्य कलक्टर सिंह केसरी की जयंती पर इन्दु भूषण सहाय की आत्म-कथा ‘ज़िन्दगी का सफ़र’ का हुआ लोकार्पण, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी
पटना, ५ जून। लोक-कल्याण की भावना से जीवन व्यतीत करने वाले सज्जन पुरुषों अथवा देवियों की आत्मकथाएँ समाज के लिए प्रेरणादायी होती हैं। इसीलिए आत्म-कथाओं का व्यापक महत्त्व है। बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे सुबुद्ध लेखक इन्दु भूषण सहाय, सभी प्रकार की…
विज्ञान-कथा-साहित्य में हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है ‘वेव एलियंस’ / साहित्य सम्मेलन में हुआ डा रमेश पाठक के उपन्यास का लोकार्पण, आयोजित हुई लघुकथा-गोष्ठी
पटना, ११ फरबरी। सर्वश्रेष्ठ विज्ञान-कथा धारावाहिक के रूप में प्रसार-भारती, भारत सरकार से पुरस्कृत और आकाशवाणी, पटना से प्रसारित धारावाहिक ‘वेव एलियंस’ के लेखक डा रमेश पाठक का इसी नाम से प्रकाशित उपन्यास ‘वेव एलियंस’ हिन्दी में…
साग मीट’ के माध्यम से उठाया सवाल- हर बार स्त्री ही दोषी क्यों?साहित्य सम्मेलन के मंच पर हुई नाटक की प्रस्तुति, निर्मला सिंह ने एकल अभिनय से जीता दर्शकों का दिल
पटना, २५ जनवरी। स्त्रियों पर होते आ रहे अत्याचार के हर प्रसंग पर स्त्रियों को ही दोषी ठहराने की विद्रुप मानसिकता पर कड़े सवाल करते नाटक ‘साग मीट’ की बेहतरीन प्रस्तुति शनिवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के मंच पर की गयी। सुप्रसिद्ध नाटककार…
बिहार में हिन्दी के सबसे बड़े ध्वज-वाहक थे डा लक्ष्मी नारायण सुधांशु,जयंती पर स्मृति-शेष कवि विजय अमरेश भी किए गए याद, साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, १८ जनवरी। बिहार में हिन्दी भाषा के सबसे बड़े ध्वज-वाहक थे डा लक्ष्मी नारायण सुधांशु। उनके ही प्रयास से बिहार की यह राजकीय भाषा बनी। ‘राष्ट्र भाषा परिषद’ और ‘हिन्दी प्रगति समिति’ की स्थापना के भी वे ही मुख्य सूत्र-धार थे।…
CIN /हिन्दी शीघ्र बनायी जाए ‘भारत की राष्ट्राभाषा’ की मांग के साथ साहित्य,सम्मेलन में हिन्दी पखवारा एवं पुस्तक चौदास मेला का हुआ समापन
पटना, १५ सितम्बर। हिन्दी शीघ्र ही ‘भारत की राष्ट्र-भाषा’ बनायी जाए इस मांग तथा इसके लिए अनिश्चित क़ालीन संघर्ष जारी रखने के संकलप के साथ, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, विगत १ सितम्बर से, हिन्दी-दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिन्दी…
पटना /भारतेन्दु जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई ‘हिन्दी साहित्य में बिहार का योगदान’ पर संगोष्ठी
पटना, ९ सितम्बर। हिन्दी भाषा और साहित्य के उन्नयन में बिहार के साहित्यकारों का अन्यतम योगदान है। बिहार में ही हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास लिखा गया। आरा के यशस्वी साहित्यकार ब्रजनंदा सहाय ‘ब्रजवल्लभ’ ने ‘सौंदयोपासक’ नामक उपन्यास…
CIN /महान स्वतंत्रता-सेनानी,सिद्धान्तवादी और महाकवि थे रामदयाल पाण्डेय,अंग्रेज़ी सरकार ने उन पर ‘देखते ही गोली मारने का आदेश’ दे रखा था, साहित्य सम्मेलन में मनायी गयी जयंती
पटना ब्यूरो , ६ अगस्त। हिन्दी के महान उन्नायकों में से एक महाकवि रामदयाल पाण्डेय न केवल एक महान स्वतंत्रता-सेनानी, तेजस्वी पत्रकार और राष्ट्रीय भाव के महाकवि ही थे, बल्कि सिद्धान्त और आदर्शों से कभी न डिगने वाले एक स्वाभिमानी साधु-पुरुष भी थे।…
CIN /बच्चन की ‘मधुशाला’ परम चेतना की ओर संकेत करती है,भारत की स्त्री-चेतना का प्रतिनिधित्व करती हैं मृदुला सिन्हा- जयंती पर साहित्य सम्मेलन में, कवि अर्जुन सिंह की तीन पुस्तकों का हुआ लोकार्पण, दी गई काव्यांजलि
पटना, २७ नवम्बर। जीवन के प्रति सकारात्मक राग, प्रेम और दर्शन के कवि हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ परम चेतना की ओर एक सूक्ष्म संकेत है। वह कोई मद्यपों का स्थल नहीं, अपितु आनन्द के शास्वत स्रोत ‘ब्रह्म’ है। बच्चन हिन्दी-काव्य में…
पटना /साहित्य सम्मेलन में चार साहित्यिक विभूतियों की मनायी गयी जयंती, दी गई काव्यांजलि
पटना, ५ नवम्बर। महाकवि पं मोहनलाल महतो’वियोगी’ आधुनिक हिन्दी साहित्य के निर्माताओं में से एक और बीसवीं शताब्दी के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों में अग्र-पांक्तेय थे। उनकी साहित्यिक-प्रतिभा, काव्य-कल्पनाएँ और विपुल-लेखन अचंभित करते हैं।…
पटना /हिन्दी के चलते फिरते विश्वविद्यालय थे पं जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी-जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने अपने प्रथम अध्यक्ष का किया श्रद्धापूर्वक स्मरण
पटना, ८ अक्टूबर। खड़ी बोली हिन्दी की प्रथम पीढ़ी के महान कवियों और भाषाविदों में अग्रपांक्तेय विद्वान पं जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रथम सभापति थे। वे हिन्दी के एक चलते-फिरते विश्वविद्यालय थे। एक क्षण के लिए भी उनके पास आए…
पटना /स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी जी-२० के तत्त्वावधान में आयोजित हुआ ‘साहित्य समागम’,
पटना, १४ अगस्त। “जो खद के लिए जिए वो इंसान क्या जिया/ जो देश पर मिटे उसे सौ-सौ सलाम कहना।”– “पिया बनिता तू सेना के सिपाही, त हमहु गुमान करती”—- “होते हरिश्चचन्द्र टेरेते पुकार फिर, नींद टूट जाती इस देश के निवासी की”…
पटना /हिमालय की तरह ऊँचा था आचार्य शिवपूजन सहाय का साहित्यिक व्यक्तित्व
पटना, ९ अगस्त। फ़क़ीरी की ज़िंदगी जीने वाले हिन्दी के महान साहित्य सेवी आचार्य शिव पूजन सहाय का साहित्यिक व्यक्तित्व हिमालय की तरह ऊँचा था। गीतों के राज कुमार थे नेपाली। उनके गीत हिमशिखर से झरते हुए प्रखर प्रपात की तरह थे। इन दोनों साहित्य-मनीषियों ने…