पटना डेस्क / डा. सुधांशु के कारण गठित हुई राष्ट्रभाषा परिषद और हिन्दी प्रगति समिति जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित संगोष्ठी और लघुकथा-गोष्ठी
पटना, १८ जनवरी। हिन्दी भाषा के उन्नयन में भारत के जिन महानुभावों ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनमें एक अत्यंत आदरणीय नाम डा लक्ष्मी नारायण सिंह ‘सुधांशु’ जी का है। वे बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी थे और बिहार विधान सभा के…
पटना /साहित्य सम्मेलन के फ़ेसबुक पटल पर लाइव हुईं देश की सुप्रतिष्ठ कवयित्री डा मधु चतुर्वेदी, डा अनिल सुलभ ने डा चतुर्वेदी का हार्दिकता से स्वागत किया
पटना, ६ जुलाई। “रोज़ पाबंदियाँ लगाते हैं/ वो मेरे हौसले बढ़ाते हैं—ज़रा सी बाढ़ आते ही लगे जो तोड़ने सीमा/ वो कोई ताल है उथला/ समंदर हो नही सकता ——-ये तेरी दास्ताँ है, और मैं हूँ/ सुलगता सा समां है, और मैं हूँ“। इन और ऐसी ही…
पटना /अपनी ख़्वाहिश के परींदे पर निशाना रखना— साहित्य सम्मेलन के फ़ेसबुक पटल पर लाइव हुए डा सुरेश अवस्थी
पटना, ३ जुलाई। “अपनी ख़्वाहिश के परींदे पर निशाना रखना/ ज़िंदगी का जो सफ़र है सुहाना रखना—- गुलों से बात करने में जो बेअदबी करते हैं/ नीयत में उनके ईश्वर नुक़िले खाद देता है”। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के फ़ेसबुक पटल पर, शुक्रवार की…