पटना /नही रहीं विदुषी प्राध्यापिका और हिन्दी-सेवी प्रो वीणा श्रीवास्तव निधन पर साहित्य सम्मेलन ने गहरा शोक प्रकट किया, डॉ. अनिल सुलभ ने गहरा दुःख जताया
पटना, ३ अगस्त। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा, देश की चुनी हुई १०० विदुषियों में सम्मिलित और ‘शताब्दी-सम्मान’ से विभूषित, प्रख्यात विदुषी और पटना विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो वीणा रानी श्रीवास्तव नही रहीं। रविवार…
पटना /सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने सम्मेलन के फ़ेसबुक-पृष्ठ पर डा लता चौहान जी का हार्दिकता से अभिनंदन किया
पटना, २४ जुलाई। “कैसा मंज़र है ये, कैसी मौत–सी आहट है/ दबे पाँव आ रही घबराहट है”—- “सुना है हर बात का जवाब रखते हो तुम/क्या तन्हाई का भी हिसाब रखते हो तुम?”—” समंदर का सैलाब अब उतरने लगा है/ शाम का मौसम बदलने लगा…
पटना /जयंती ( १३ जुलाई ) पर विशेष साहित्यिक संत थे प्रज्ञा-पुरुष मदन मोहन पाण्डेय = डा अनिल सुलभ
साहित्य-संसार में अनेक ऐसी स्तुत्य विभूतियाँ हुई हैं, जिन्हें पर्याप्त औपचारिक शिक्षा के अवसर नही मिले, किंतु उन्होंने स्वाध्याय और चिंतन से वह विभूति पायी, जिससे संसार को विपुल प्रकाश प्राप्त हुआ। उन्हीं विभूतियों में, बिहार के साधु साहित्यकार, पत्रकार…
बहु-भाषाविद विद्वान और महान हिन्दी सेवी थे आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा । जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने श्रद्धापूर्वक किया स्मरण
पटना, ७ जुलाई। बहु-भाषाविद विद्वान और महान हिंदी-सेवी आचार्य देवेंद्रनाथ शर्मा एक महान साहित्यकार और भाषा-शास्त्री ही नही, देश के गौरव-पुरुष थे। उन्हें संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, फ़ारसी, बंगला, गुजराती, मराठी, मैथिली, भोजपुरी आदि भारतीय भाषाओं के साथ…
पटना /जयंती ( २६ जून ) पर विशेष मनुष्यता और जीवन मूल्यों के कवि थे डा दीनानाथ शरण =डा अनिल सुलभ
डा दीनानाथ शरण हिन्दी के कुछ उन थोड़े से मनीषी साहित्यकारों में थे, जो यश की कामना से दूर, जीवन पर्यन्त साहित्य और पत्रकारिता की एकांतिक सेवा करते रहे। वे कवि का एक विराट हृदय रखते थे। मनुष्यता और जीवन-मूल्यों की कविताएँ रचीं और एक सजग कवि के रूप में…
गुरुधाम में मनाया गया सद्ग़ुरुमाता माँ विजया जी का अवतरण दिवस । ‘कोरोना वायरस’ से संसार की रक्षा हेतु इस्सयोगियों ने की ‘ब्रह्माण्ड-साधना’
कौशलेन्द्र पाण्डेय / पटना, १७ मार्च। आध्यात्मिक साधना–पद्धति ‘इस्सयोग‘ की सह–प्रवर्त्तक एवं अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज की अध्यक्ष सद्ग़ुरुमाता माँ विजया जी के ७३वें अवतरण दिवस पर, मंगलवार की संध्या कंकड़बाग…
पद्म सम्मान से साहित्य सम्मेलन का ध्वज और ऊँचा हुआ है: डा अनिल सुलभ । सम्मेलन से जुड़ी पद्म-सम्मान से विभूषित विदुषियों और विद्वानों का किया गया भव्य अभिनंदन
पटना, १ फरबरी। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन से संबद्ध बिहार की विदुषियों और विद्वानों के पद्म–सम्मान हेतु चयन से सम्मेलन का मान–ध्वज और ऊँचा हुआ है। सम्मानित होनेवाली बिहार की इन सभी विभूतियों ने साहित्य, कला और समाज की अत्यंत मूल्यवान सेवाएँ…
प्रत्येक दिव्यांग में कोई न कोई विशेष गुण होता है : मंत्री । हेल्थ इंस्टिच्युट में मनाया गया विश्वविकलांग दिवस समारोह,दिव्यांगों के बीच वितरित की गई चल-कुर्सियाँ, श्रवण-यंत्र और बैशाखी
पटना कौशलेन्द्र पाण्डेय , ३ दिसम्बर । प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई विशेष गुण होता है। दिव्यांग जनों में यह और भी विकसित रूप में होता है। इनमें आत्म–बल भर कर, इनके विशेष गुणों को और विकसित कर हम उनका हीं नहीं समाज का भी भला कर सकते हैं। राष्ट्र के…
समीक्षकों की दृष्टि से अलक्षित रह गए महाकवि ब्रजनंदन सहाय ‘मोहन प्रेमयोगी’ । स्मृति में आयोजित हुई श्रद्धांजलि-सभा, कवियों ने दी काव्यांजलि
पटना-कौशलेन्द्र पाण्डेय, पटना, ३० नवम्बर । महाकाव्य ‘महाशक्ति‘, ‘मेनका‘, ‘रास–रचैया‘, ‘जागरी वसुंधरा‘, ‘धरती की पुकार पर‘, ‘आह्वान‘, ‘गतगंधा‘,…
प्रकाशनाथ मिश्र के काव्य-संग्रह ‘हे राम! तुम कब आओगे?’ का लोकार्पण, पुर्ब राज्यपाल मृदुला सिन्हा और डॉ० अनिल सुलभ ने किया
भारतीय पुलिस सेवा के अवकाश प्राप्त अधिकारी और कवि श्री प्रकाशनाथ मिश्र के काव्य-संग्रह ‘हे राम! तुम कब आओगे?’ का लोकार्पण, गोवा की महामहिम पूर्व राज्यपाल और विदुषी लेखिका डा मृदुला सिन्हा द्वारा बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, क़दमकुआं, पटना…
नही रहे वयोवृद्ध साहित्य सेवी जगत नारायण ‘जगतबंधु’। ९२ वर्ष की आयु तक रहे निरंतर सक्रिए, साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई शोक-गोष्ठी
पटना से कौशलेन्द्र पाण्डेय पटना, १२ नवम्बर। अपने जीवन को किस प्रकार मूल्यवान और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है, इसके जीवंत उदाहरण और प्रेरणा–पुरुष थे, वयोवृद्ध साहित्यसेवी जगत नारायण प्रसाद ‘जगतबंधु‘। इनका अनुशासित और कल्याणकारी जीवन…
यश की लालसा से दूर अपने समय के सबसे बड़े साहित्यकार थे श्रीरंजन सूरिदेव । प्रथम पुण्य-स्मृति दिवस पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ स्मृति-पर्व, दी गई श्रद्धांजलि !
पटना से कौशलेन्द्र पाण्डेय पटना, ११ नवम्बर । नाम–यश की लालसा से सर्वथा दूर, एकांतिक साधना में निमग्न, साहित्य के पर्यावाची शब्द थे, आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव। उनके संपूर्ण व्यक्तित्व से ‘साहित्य‘ टपकता था। साहित्यकार को लेकर एक जो अनूठी…