साहित्य सम्मेलन में विदुषी कवयित्री डा ललितांशुमयी की जयंती पर आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, २ अप्रैल। “मैं मरुथल-सा चिर प्यासा, तू प्रेम सुधा की अविरल धारा/ मैं स्वाति का एक बूँद तू प्रेम सुधा की अविरल धारा–“, “क्योंकि तुम्हारे आने से हवा में घुल जाती है मिठास।”, आदि काव्य-पंक्तियों से बिहार हिन्दी साहित्य…