संघर्ष, स्नेह और संस्कार का मूर्ति स्वरूप होते हैं – “पिता”
प्रशांत कुमार सिन्हा, बेंगलुरु, 15 जून, 2025 ::भारतीय सनातन संस्कृति में पिता को देवता के तुल्य माना जाता है। “पिता स्वर्ग, पिता धर्मः, पिता हि परमं तपः” ऐसा कहा गया है, अर्थात पिता स्वर्ग के समान हैं, धर्म हैं और तपस्या के परम स्वरूप हैं। पिता वह…