सौरभ निगम | कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी/ भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य (सीफूड) बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने तथा मत्स्य मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधिकारियों, निर्यातकों, उद्योग विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में ट्रेसबिलिटी, सतत प्रमाणन, मूल्य संवर्धन, निर्यात विविधीकरण तथा गहरे समुद्री क्षेत्रों में उपलब्ध उच्च-मूल्य संसाधनों के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता, पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक को अपनाकर भारतीय सीफूड उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि देश के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली अंतर्देशीय मत्स्य पालन प्रणाली से भी निर्यात बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। साथ ही रेडी-टू-ईट उत्पादों और उच्च-मूल्य वाली मछली प्रजातियों जैसे उभरते क्षेत्रों में अवसरों का लाभ उठाने की आवश्यकता बताई गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कोल्ड-चेन, प्रसंस्करण सुविधाओं, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक प्रमाणन व्यवस्था को मजबूत कर भारत समुद्री खाद्य निर्यात के क्षेत्र में अपनी वैश्विक हिस्सेदारी को और बढ़ा सकता है।
कार्यशाला में समुद्री खाद्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने निर्यात वृद्धि, रोजगार सृजन और मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर बल दिया।
— कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी




























