संविधान विरोधी हरकत सामने आ जाने के बाद जेन-जी को मतदान के अधिकार से वंचित करने की साजिश रचने वाले ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त पद पर बने रहने का अब कोई औचित्य नहीं
पटना 1 अक्टूबर 2026 ; राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए संविधान विरोधी फैसले के सामने आ जाने के बाद उन्हें पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। जिस प्रकार मतदाता सूची में नये मतदाता का नाम जोड़ने के लिए आवेदन करने वाले फॉर्म 6 से एनेक्सचर ‘डी’ को वापस लेना पड़ा है, इससे यह स्पष्ट है कि यह फैसला हीं संविधान और विधि विरोधी था।
राजद नेता ने कहा है कि एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार अन्य दो चुनाव आयुक्तों के आपत्ति के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह गैर संवैधानिक फैसला लिया गया था। इसका स्पष्ट मकसद जेन-जी मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित रखना था। मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने वाले फॉर्म 6 में पहले से एनेक्सचर ‘डी’ का कोई प्रावधान हीं नहीं था। 18 वर्ष की आयु पुरा कर चुके जेन-जी को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए एनेक्सचर ‘डी’ के माध्यम से यह प्रमाणित किया जाना अनिवार्य कर दिया गया था कि पूर्व में हुए एसआईआर के मतदाता सूची ( 2003 के मतदाता सूची) में उनके माता-पिता अथवा बाबा -दादी का नाम शामिल था। वहीं दूसरी ओर एक और खेला यह कर दिया गया कि चुनाव आयोग के बेवसाइट से 2003 का मतदाता सूची हीं गायब कर दिया गया।
चुनाव आयोग द्वारा कल लिए गए महत्वपूर्ण फैसले में फॉर्म 6 से एनेक्सचर ‘डी’को हटा लिया गया है। मतलब स्पष्ट है कि चुनाव आयोग यह मान चुका है कि फॉर्म 6 में एनेक्सचर ‘डी’ जोड़ने का फैसला गैर संवैधानिक हीं नहीं बल्कि उसके अधिकार क्षेत्र में हीं नहीं है। फिर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर गैर संवैधानिक फैसला लेने वाला व्यक्ति किसी संवैधानिक और बहुत बड़े जिम्मेदार पद पर कैसे रह सकता है?