गांधी जयंती के अवसर पर टी.पी.एस. कॉलेज में विशेष व्याख्यान का आयोजन
प्रियंका भारद्वाज / पटना, 06 अक्टूबर 2026: टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के इतिहास विभाग द्वारा आईक्यूएसी (IQAC) के तत्वावधान में गांधी जयंती के अवसर पर “महात्मा गांधी और आज का युवा : विचार, मूल्य एवं प्रासंगिकता” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन कौटिल्य सभागार में किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री ललित कुमार सिंह, उप निदेशक, बापू टॉवर, पटना ने अपने व्याख्यान में महात्मा गांधी के विचारों, मूल्यों एवं उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गांधीजी की ‘नई तालीम’ (Basic Education) की अवधारणा को वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को किसी न किसी व्यावहारिक कौशल को सीखने तथा स्व-रोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में युवाओं को गांधीजी के सत्य, अनुशासन, समय प्रबंधन, आत्मनियंत्रण एवं श्रम की गरिमा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। श्री सिंह ने विद्यार्थियों से सत्य बोलने की आदत विकसित करने, समय का सदुपयोग करने तथा अपने ज्ञान और कौशल के बल पर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के विचार केवल इतिहास का विषय नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के निर्माण की आधारशिला हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य, प्रधानाचार्य, टी.पी.एस. कॉलेज, पटना ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचार भारतीय समाज को नैतिक दिशा प्रदान करते हैं तथा युवा पीढ़ी को उनके जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेकर सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित होना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रो. रूपम, आईक्यूएसी समन्वयक की विशिष्ट उपस्थिति रही। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और संस्थागत गुणवत्ता उन्नयन के वर्तमान दौर में गांधीजी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित न रहकर नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण को विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जीवन हमें सत्यनिष्ठा, सेवा, अनुशासन और आत्मचिंतन का मार्ग दिखाता है तथा उच्च शिक्षा संस्थानों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में इन मूल्यों का संवर्धन करें।
कार्यक्रम का विषय प्रवेश डॉ. प्रशांत कुमार, सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए गांधीजी के विचारों की समकालीन उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा कहा कि आज के युवाओं के लिए गांधीजी का जीवन प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं मंच संचालक डॉ. नूपुर, सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग थीं, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन किया। अंत में डॉ. मुकुंद कुमार, सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. शशि भूषण चौधरी, डॉ. अश्विनी (हिंदी विभाग), डॉ. सुशोभन पलाधी (रसायन विभाग), डॉ. तरन्नुम (मनोविज्ञान विभाग), डॉ. सुनीता, डॉ. चंद्रशेखर, डॉ. हंस (भौतिकी विभाग), डॉ. शशि शेखर कुमार सिंह (गणित विभाग), श्रीमती अनीता सिंह सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों एवं मूल्यों को आत्मसात कर एक जागरूक, नैतिक एवं आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।