पटना, ७ सितम्बर। काव्य में नूतनता ‘काव्य-साहित्य’ में पाठकों की रूचि बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। समृद्ध काव्य-कल्पनाएँ कविता का ऋंगार करती हैं। यही कवि की शक्ति भी है। ऋंगार से कविता रूपवती होती है और प्रयोग से आकर्षक । किन्तु प्रयोग इस प्रकार का न हो, जो कविता को छिन्न-भिन्न कर दे। यह ध्यान रहे कि कविता का सौंदर्य ही पाठकों को कर्षित करता है। सौंदर्य-विहीन सपाट कविताएँ हृदय में उतर नहीं पातीं। इसीलिए काव्य-शास्त्र में अलंकार, प्रतीक, शब्द-संयोजन, छंद और काव्य-कल्पनाओं पर बल दिया गया है।
यह बातें बुधवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित सुप्रसिद्ध कवि-चित्रकार सिद्धेश्वर के ग़ज़ल-संग्रह ‘सिद्धेश्वर की आज़ाद ग़ज़लें’ के लोकार्पण-समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि श्री सिद्धेश्वर एक परिश्रमी और काव्य-निष्ठा से समृद्ध कवि हैं। ग़ज़लें भी आज़ाद हो सकती हैं, यह इनके विचार में आया और उसे व्यक्त करने की चेष्टा कर रहे हैं। हिन्दी-ऊर्दू के ग़ज़लकार इसे किस रूप में देखेंगे, यह समय निश्चित करेगा, किंतु ग़ज़लकार को शुभकामनाएँ प्राप्त होनी चाहिए।
पुस्तक का लोकार्पण करते हुए, सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद ने ग़ज़ल कहने की परंपरा और ग़ज़ल के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की और इस पुराने स्वरूप से सिद्धेश्वर किस प्रकार अलग हुए हैं, इसे रेखांकित किया।
समारोह के मुख्य अतिथि और बिहार विधान परिषद के सदस्य डा राज वर्धन आज़ाद ने कहा कि ग़ज़लकार सिद्धेश्वर जी ने ग़ज़ल के पारंपरिक बंधन को एक सीमा तक तोड़ने की कोशिश की है, जिसे स्वीकार किया जा सकता है।
वरिष्ठ साहित्यकार और गोष्ठी के मुख्य-वक्ता डा किशोर सिन्हा का विचार था कि इश्क़ से आरम्भ हुई आज के दौर में पहुँची ग़ज़ल के मिज़ाज में बदलाव आते रहे हैं। देखने में यह पुस्तक एक पत्रिका जैसी दिखती है। अपने चित्रों से सजी और बहुरंगी होने के कारण देखने में अवश्य ही यह पुस्तक अच्छी लगती है।
कवि मधुरेश नारायण, अमरेन्द्र कुमार उन्मेष, रामयतन यादव, डा ऋचा वर्मा, डा अंकेश कुमार, डा विद्या चौधरी, डा अर्चना त्रिपाठी, भगवान शंकर, धनंजय कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए तथा कवि को शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर लोकार्पित पुस्तक के कवि सिद्धेश्वर ने कहा कि अपनी प्रस्तुति, कलात्मकता और आकार-प्रकार की दृष्टि से संसार का अनूठा ग़ज़ल-संग्रह है। अतिथियों का स्वागत राजप्रिया रानी ने तथा मंच का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया।
डा नागेश्वर प्रसाद यादव, ईं अशोक कुमार, इन्दुभूषण सहाय, डा पंकज कुमार पाण्डेय, संजय कुमार शुक्ल, धनंजय कुमार, अभिराम बुद्धवाहा,शिव कुमार, बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता आदि प्रबुद्धजन उपस्थित थे।