एक विशाल वट-वृक्ष थे रवींद्र किशोर सिन्हा / साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुई श्रद्धांजलि-सभा
पटना, ३ नवम्बर । सुप्रसिद्ध समाजसेवी, पत्रकार, उद्यमी और राजनेता डा रवीन्द्र किशोर सिन्हा का व्यक्तित्व एक ऐसे विशाल वट-वृक्ष के समान था, जिसके कोटरों और छाया में अनेक जीव पोषण और संरक्षण पाते हैं। अपने महान उद्यम और पुरुषार्थ के बल पर राई से पर्वत का आकार प्राप्त करने वाले वे एक विरल व्यक्ति थे, जिनके विशाल हृदय में करुणा और उदारता थी। सहायता की आशा लेकर आने वाले व्यक्तियों को, उनकी अपेक्षा से अधिक देकर ससम्मान विदा करने वाले वे संभवतः इस समय के अकेले व्यक्ति थे। उनके न होने से आज अनेक घर अनाथ हो गए हैं। लाखों लोग इस देश में धन-कुबेर हैं, पर कोई आर के सिन्हा नहीं हो सकता।
यह बातें मंगलवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में श्री सिंह के निधन पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही । उन्होंने कहा कि सिन्हा जी साहित्य सम्मेलन के भी अनन्य शुभेच्छु और संरक्षक थे । सम्मेलन के पाँच महाधिवेशनों के स्वागताध्यक्ष रहे । प्रत्येक महाधिवेशन का लगभग सारा बोझ उठा लिया करते थे। एक महाधिवेशन के लिए हमने आर्थिक सहयोग लेने से मना कर दिया यह सिद्ध करने के लिए कि हम उन्हें आर्थिक-सहायता मात्र के लिए स्वागताध्यक्ष नहीं बनाते, अपितु उन्हें एक उदार संस्कृति-पुरुष मानकर यह सम्मान देते हैं। सम्मेलन ने उन्हें “विद्यावाचस्पति” की उपाधि से भी विभूषित किया था । सम्मेलन का आगामी महाधिवेशन विश्रुत विद्वान आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव तथा डा रवीन्द्र किशोर सिन्हा की स्मृति को समर्पित किया जाएगा ।
स्वर्गीय सिन्हा के निकट सहयोगी रहे कुमार अनुपम ने कहा कि सिन्हा जी एक महान समाज सेवी तो थे ही, अपने बिहार से बहुत प्रेम करते थे। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की थी कि उनके व्यापार से दिया जाने वाला कर बिहार को प्राप्त हो। उनके सभी कर्मियों को हिस्से के रूप में लाभांश मिलता है। उनकी कृपा प्राप्त कर सैकड़ों ग़रीब विद्यार्थी चिकित्सक, अभियंता और अधिकारी बन गए!
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रत्नेश्वर सिंह, श्याम बिहारी प्रभाकर, डा नागेश्वर यादव, सुनील कुमार दूबे, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, कुमार अनुपम, डा पूनम आनंद, ईं अशोक कुमार, चित्तरंजन भारती, डा मनोज गोवर्धनपुरी, प्रो सावित्री कुमारी, प्रवीर कुमार पंकज, इंदु भूषण सहाय, अधिवक्ता हरि मोहन मिश्र, संजय शुक्ल, नमिता लोहानी आदि सम्मिलित थे ।