दुशांबे (ताजिकिस्तान), 1 जून 2025 — भारत ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। “ग्लेशियर संरक्षण और जलवायु परिवर्तन” पर केंद्रित इस सम्मेलन में भारत की ओर से केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भाग लिया।
मंत्री श्री सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एकजुट होकर काम करने में विश्वास रखता है। उन्होंने विकासशील देशों के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने, साझा वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा वित्तीय एवं तकनीकी सहायता में वृद्धि की जरूरत पर बल दिया।
भारत का जोर:
जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियरों पर बढ़ते खतरे को लेकर भारत गंभीर है।
हिमालयी क्षेत्र में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों से भारत समेत कई दक्षिण एशियाई देशों के लिए जल संकट का खतरा बढ़ रहा है।
मंत्री सिंह ने भारत द्वारा चलाए जा रहे जलवायु अनुकूल विकास कार्यक्रमों और जल संरक्षण अभियानों की जानकारी साझा की।
उन्होंने ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE)’ मिशन का भी उल्लेख किया, जो पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देता है।
वैश्विक सहयोग की आवश्यकता
भारत ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना अकेले कोई देश नहीं कर सकता। खासकर हिमालयी और ग्लेशियर-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए साझा दृष्टिकोण और तकनीकी नवाचारों की आवश्यकता है।
सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने जलवायु संकट से निपटने के लिए अनुभवों और रणनीतियों का आदान-प्रदान किया। भारत की सक्रिय भागीदारी ने एक बार फिर उसके पर्यावरणीय नेतृत्व को रेखांकित किया है।
सूत्र: PIB प्रेस विज्ञप्ति




























