अति पिछड़ों के नाम पर राजनीति बंद करें कांग्रेस-राजद, कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों से नहीं, केवल वोट से है लगाव – डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव
पटना 25 सितंबर 2025/ जद(यू) प्रदेश प्रवक्ता डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव ने खुद को अति पिछड़ा,पिछड़ा एवं दलित समुदाय का हितैषी बताने वाली कांग्रेस और आरजेडी पर तीखा हमला बोला और कहा कि राजनीतिक मंचों पर ‘अति पिछड़ा न्याय संकल्प’ की बातें करने वाली कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल को जब मंच पर जननायक कर्पूरी ठाकुर का चित्र लगाने में परहेज होता है, तब उनके अति पिछड़ा,पिछड़ा एवं दलित समुदाय के प्रति कथित समर्पण की सच्चाई सामने आ जाती है। जो दल कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा और संघर्ष से परहेज करते हैं, वे अति पिछड़ों के नाम पर सिर्फ भावनात्मक शोषण कर रहे हैं, न कि उन्हें न्याय दिलाने का कोई वास्तविक प्रयास।
जब ये पार्टियां सत्ता से बाहर होती हैं, तभी इन्हें पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित समाज की याद आती है। यह राजनीतिक अवसरवादिता नहीं तो और क्या है? राहुल गांधी की पार्टी 55 वर्षों तक केंद्र में रही, लेकिन उन्होंने केंद्रीय सेवाओं में पिछड़ों को आरक्षण से वंचित रखा। क्या राहुल गांधी आज यह बताएंगे कि लाखों पिछड़े युवाओं को आईएएस,आईपीएस और अन्य केंद्रीय सेवाओं में जाने से क्यों रोका गया? क्या इस ऐतिहासिक अन्याय की क्षतिपूर्ति कभी संभव हो पाएगी?
उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के अति पिछड़ों के आरक्षण को खत्म करने की कोशिश की लेकिन तत्कालीन जनता दल नेता नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव की कोशिशों का जमकर विरोध किया और कर्पूरी ठाकुर के आरक्षण फाॅर्मूले को जारी रखने की बात कही। जिसका परिणाम हुआ कि नीतीश कुमार के विरोध के चलते लालू प्रसाद यादव ने अपनी मंशा को पुनः कभी जारी नहीं किया। दरअसल कर्पूरी ठाकुर के सपनों को सही मायनों में बिहार में कोई साकार किया है तो वो हैं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार। पंचायती राज, नगर निकाय में अति पिछड़ा और दलितों के साथ सभी तबकों के महिलाओं को आरक्षण देकर उन्होंने उनके सपनों को पूरा किया। साथ ही शराबबंदी जैसे सामाजिक अभियान को भी कार्यरुप दिया।
तेजस्वी यादव को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब उनकी पार्टी 15 वर्षों तक बिहार की सत्ता में रही और 10 वर्षों तक केंद्र में साझेदार रही, तब अति पिछड़ों को राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक ताकत क्यों नहीं दी गई? क्यों नहीं उनके लिए कोई ठोस योजना बनी? क्यों नहीं उनकी आवाज को लोकतंत्र में सम्मान मिला?
आज जो अधिकार अति पिछड़ों को मिले हैं, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदृष्टि, सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और समावेशी राजनीति का परिणाम है। कांग्रेस एवं आरजेडी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर को बैनर से भी परहेज करने वाले दल पिछड़ों, अति पिछड़ों की बात करने चले हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद को समाज के सबसे पिछड़े वर्गों को केवल चुनावी मुद्दा बनाना बंद कर देना चाहिए। अगर वास्तव में उनके हक की बात करनी है, तो पहले अपने इतिहास का सच स्वीकार करें दृ और यह भी बताएं कि पिछड़ों के हकों की लूट की भरपाई कैसे करेंगे।