नई दिल्ली। केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के सहयोग से आयोजित ‘खेल प्रशासन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए भारत के खेल तंत्र के लिए सरकार की स्पष्ट और अटल प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर भारतीय खेलों के लिए स्वर्णिम युग है और इतिहास हमारे आज के प्रयासों को याद रखेगा।
डॉ. मांडविया ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार खेल प्रशासन में शासन सुधार, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि एक प्रतिस्पर्धी और निष्पक्ष वातावरण तैयार करना आवश्यक है, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार की रणनीति जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक प्रतिभाओं की पहचान और पोषण पर केंद्रित है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय खेल ढांचों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों से भी उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच मिल सके।
उन्होंने कोचिंग तंत्र को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया। डॉ. मांडविया ने कहा कि आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कोचिंग से ही खिलाड़ियों का समग्र विकास संभव है।
इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने खेल अवसंरचना, अकादमियों और खेल लीगों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल से न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि खेलों को पेशेवर और टिकाऊ आधार भी मिलेगा।
सम्मेलन के दौरान डॉ. मांडविया ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के सहयोग, खेल संगठनों की सक्रिय भूमिका और निजी क्षेत्र की भागीदारी से भारत आने वाले वर्षों में खेल महाशक्ति के रूप में उभरेगा।
— कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी





























