हैदराबाद। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने डीबीटी–सीडीएफडी, हैदराबाद में समर्थ स्किल सेंटर का शिलान्यास किया तथा आईडिया–एनए ब्रिक–सीडीएफडी टेक्नोलॉजी इंक्यूबेटर का उद्घाटन किया। यह पहल भारत में जैव-प्रौद्योगिकी, आणविक चिकित्सा और उन्नत स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बीते दशकों में भारत मुख्य रूप से संक्रामक रोगों से जूझता रहा है, लेकिन अब देश स्वास्थ्य सुरक्षा के भविष्योन्मुखी चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आणविक निदान (Molecular Diagnostics), जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing) और व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalised Medicine) स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बिंदु बनेंगी।
डॉ. सिंह ने कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीडीएफडी) जैसे संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये संस्थान प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान को वास्तविक जीवन के नैदानिक परिणामों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। इससे शोध और उपचार के बीच की दूरी कम हो रही है, जो आम जनता के लिए अत्यंत लाभकारी है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को आनुवंशिक और दुर्लभ रोगों के क्षेत्र में रणनीतिक रूप से आगे बढ़ना होगा। इसके तहत प्रारंभिक पहचान, किफायती इलाज और रोगी-विशेष के अनुसार व्यक्तिगत उपचार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
समर्थ स्किल सेंटर और टेक्नोलॉजी इंक्यूबेटर के माध्यम से युवाओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को उन्नत प्रशिक्षण, नवाचार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य और जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर सकेगा।
(स्रोत: पीआईबी)
रिपोर्ट: कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी



























