बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में ध्वजारोहण, डॉ. अनिल सुलभ ने साहित्यकारों के बलिदान को किया नमन
पटना।
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन परिसर में आयोजित समारोह में सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में साहित्यकारों के अमर बलिदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि देश की आज़ादी केवल तलवार और बंदूक से नहीं, बल्कि कलम की ताकत से भी हासिल हुई है।
ध्वजारोहण के उपरांत उपस्थित साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. सुलभ ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिन्दी साहित्य ने जनमानस को जाग्रत करने, राष्ट्रीय चेतना को प्रखर करने और गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र, मैथिलीशरण गुप्त, सुभद्राकुमारी चौहान जैसे साहित्यकारों की रचनाएं केवल साहित्य नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का शंखनाद थीं।
डॉ. अनिल सुलभ ने वर्तमान समय में हिन्दी-सेवियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है, तब हिन्दी साहित्यकारों का दायित्व और भी बढ़ गया है। उन्होंने हिन्दी-सेवियों से आह्वान किया कि वे देश के वैश्विक चरित्र के निर्माण में अपनी रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित करें और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को विश्व तक पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। इसे आधुनिक संदर्भों, वैश्विक विमर्श और तकनीकी युग से जोड़कर नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाना समय की मांग है।
कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन के अन्य पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ साहित्यकारों ने भी अपने विचार रखे। समारोह का वातावरण देशभक्ति और साहित्यिक चेतना से ओतप्रोत रहा।
— कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी
























