Kaushlendra Pandey /राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर तीखी आलोचना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नें किया.नई दिल्ली में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाए जाने को लेकर भारत के चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं.
विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इसे लोकतंत्र के साथ एक करुण प्रहसन करार दिया है.आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग संविधान और माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के बजाय सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहा है.
बयान में कहा गया कि आयोग नागरिकों के वोट के अधिकार की रक्षा करने के बजाय नए नए बहाने बनाकर लोगों को मताधिकार से वंचित कर रहा है.
आलोचकों का कहना है कि लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी जैसे शब्दों का सहारा लेकर आम जनता को परेशान किया जा रहा है.
वृद्ध नागरिकों 85 90 और 95 वर्ष तक के बुजुर्गों को बुलाया जा रहा है वहीं शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों को भी आयोग के सामने पेश होने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो पूरी तरह अमानवीय है.
बयान में दावा किया गया कि इस कथित अवैध दबाव और उत्पीड़न के कारण अब तक 130 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
कई मामलों में आत्महत्या और असमय मृत्यु की घटनाएं सामने आई हैं जिसके लिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया गया है.
यह भी आरोप लगाया गया कि पूरी प्रक्रिया को नागरिकों के लिए एक तरह का एनआरसी बना दिया गया है.
जिसका सबसे अधिक असर अल्पसंख्यक समुदायों तथा अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर पड़ रहा है.
वक्ताओं ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होता है लेकिन चुनाव आयोग की पक्षपातपूर्ण और एकतरफा कार्रवाई लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर रही है.
माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती के नाम पर भय का माहौल बनाया जा रहा है और आम लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है.
ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को नैतिक रूप से राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने का कोई अधिकार नहीं है. ऐसा भी बयान में कहा गया.
रिपोर्ट कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी


























