Kaushlendra Pandey /पटना | 22 मार्च, 2026/बिहार के 114वें स्थापना दिवस के गौरवमयी अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में माननीय शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार ने राज्य की शैक्षिक प्रगति का उत्साहजनक ब्यौरा प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले दो अनमोल रत्नों— श्री दिलीप कुमार और कुमारी निधि की अभूतपूर्व सेवाओं और उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उन्हें सम्मानित किया।
शिक्षा मंत्री का संबोधन: “बड़ा सपना देखें, समृद्ध बिहार बनाएं”
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में शिक्षा मंत्री ने महिला साक्षरता में हुई ‘आशातीत बढ़ोत्तरी’ पर विशेष जोर दिया। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा:
साक्षरता में क्रांतिकारी उछाल: “जहाँ वर्ष 2001 में महिला साक्षरता दर मात्र 23% थी, वहीं आज 2026 में यह बढ़कर 74% हो गई है। यह बदलाव बिहार की बदलती तस्वीर का प्रमाण है।”
मिड-डे मील (MDM) की सफलता: उन्होंने जानकारी दी कि आज राज्य में 1 करोड़ से ज्यादा बच्चे एमडीएम योजना से लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे न केवल पोषण सुनिश्चित हुआ है बल्कि नामांकन में भी भारी वृद्धि हुई है।
आगामी लक्ष्य: मंत्री महोदय ने आह्वान किया, “हमें अब और बड़े सपने देखने होंगे। हमारी आगामी शिक्षा नीति और भी बेहतर होगी, जिससे बिहार वैश्विक पटल पर एक समृद्ध और शिक्षित राज्य के रूप में उभरेगा।”
विज्ञान और नवाचार के ध्वजवाहक: श्री दिलीप कुमार
सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज स्थित ललित नारायण लक्ष्मी नारायण प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय के विज्ञान शिक्षक श्री दिलीप कुमार आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। महामहिम राष्ट्रपति द्वारा ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025’ से सम्मानित श्री दिलीप ने विज्ञान को प्रयोगशालाओं से निकालकर बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़ दिया है।
नवाचार: अटल टिंकरिंग लैब (ATL) के माध्यम से उन्होंने छात्राओं को टेक्नोलॉजी और ‘इंस्पायर्ड अवार्ड’ जैसी प्रतियोगिताओं में वैश्विक पहचान दिलाई है।
शिक्षा और साहित्य की प्रतिमूर्ति: कुमारी निधि
किशनगंज के पोठिया स्थित प्राथमिक विद्यालय बिरनाबाड़ी की प्रधान शिक्षिका कुमारी निधि (BPSC चयनित) महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण हैं।
सामाजिक प्रभाव: उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ मोर्चा खोलकर अपने क्षेत्र में ‘जीरो ड्रॉपआउट’ सुनिश्चित किया है।
नीतिगत योगदान: उनके “निपुण बालमंच” मॉडल को बिहार सरकार ने पूरे प्रदेश में लागू किया है। 10 पुस्तकों की लेखिका निधि का नाम ‘India Book of Records’ में भी दर्ज है।
निष्कर्ष
शिक्षा मंत्री ने अंत में कहा कि इन दोनों शिक्षकों की कहानी यह सिद्ध करती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो बिहार की मिट्टी से निकले शिक्षक पूरी दुनिया को नई दिशा दिखा सकते हैं। शिक्षा विभाग इन शिक्षकों के समर्पण की सराहना करता है और इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।



























