Kaushlendra Pandey /कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी,पटना, 24 जून।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 47 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों में सबसे बड़ी राहत राज्य के लगभग 5.5 लाख शिक्षकों को मिली है। सरकार ने बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 को मंजूरी देकर वर्षों से लंबित तबादला नीति को लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही भोजपुर पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच, पांच नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, डेहरी में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप, सभी पुलों के सेफ्टी ऑडिट, धार्मिक पर्यटन परियोजनाओं तथा ग्रामीण रोजगार एवं स्वच्छता से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि शिक्षक स्थानांतरण नियमावली अधिसूचित होने के बाद प्रारंभिक विद्यालयों से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक कार्यरत शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों का स्थानांतरण ऑनलाइन, पारदर्शी और आवश्यकता आधारित प्रणाली से किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत महिला शिक्षकों को गृह पंचायत से बाहर लेकिन अपने प्रखंड की निकटवर्ती पंचायतों में तथा पुरुष शिक्षकों को गृह प्रखंड से बाहर जिले के भीतर निकटवर्ती प्रखंडों में पदस्थापित किया जाएगा। स्वास्थ्य, दिव्यांगता, पति-पत्नी के पदस्थापन और अन्य मानवीय आधारों को भी प्राथमिकता मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार होगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
कैबिनेट ने भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच कराने का भी निर्णय लिया है। पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित आयोग भरत भूषण तिवारी की मृत्यु से जुड़े पूरे मामले की जांच करेगा।
उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में सरकार ने राज्य में पांच नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें मधुबनी का शांजा विश्वविद्यालय, सिवान के दरौंधा स्थित वी.वी. गिरी विश्वविद्यालय, नवादा का एसए विश्वविद्यालय, पटना के पालीगंज स्थित हिमालय विश्वविद्यालय तथा औरंगाबाद का सीतयोग विश्वविद्यालय शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और विद्यार्थियों का दूसरे राज्यों की ओर पलायन कम होगा।
राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और बिहार सरकार के पुरातत्व निदेशालय के बीच समझौता ज्ञापन को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास का कार्य किया जाएगा।
कैबिनेट ने लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के दूसरे चरण की अवधि वर्ष 2026-27 तक बढ़ाते हुए 246 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। योजना के तहत छूटे हुए एपीएल परिवारों को भी शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
बुनियादी ढांचे के विकास को गति देते हुए रोहतास जिले के डेहरी को राज्य का 12वां ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनाने की मंजूरी दी गई है। साथ ही राज्य के सभी प्रस्तावित ग्रीनफील्ड टाउनशिप के विकास के लिए HUDCO से एक लाख करोड़ रुपये तक का ऋण लेने की भी स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा छपरा, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और भागलपुर आयोजना क्षेत्रों के विस्तार को भी मंजूरी मिली है।
जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए राज्य के सभी पुलों का स्वतंत्र एजेंसी से संरचनात्मक सेफ्टी ऑडिट कराने के लिए 47 करोड़ 76 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुंगेर जिले के तारापुर में ईशा फाउंडेशन को 15 एकड़ 1 डिसमिल भूमि 99 वर्षों की लीज पर देने का निर्णय लिया गया है, जहां धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा। वहीं बोधगया में बिहार सरकार की 34 डिसमिल भूमि नामग्याल तांत्रिक कॉलेज को 50 वर्षों की लीज पर देने की मंजूरी भी दी गई है।
इसके अलावा विकसित भारत, रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के तहत बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के गठन को भी मंजूरी दी गई है, जिससे ग्रामीण रोजगार योजनाओं के बेहतर संचालन और निगरानी को मजबूती मिलेगी।
कैबिनेट के इन फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार ने शिक्षा सुधार, सुशासन, उच्च शिक्षा, आधारभूत संरचना, धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण विकास और जनसुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

























