पटना, 28जून। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्वामिनी-समिति ‘स्थायी समिति’ ने, विगत 29 मार्च में हुई स्थायी समिति में, सम्मेलन-नियमावली के नियम-19 के विलोपन के लिए गए निर्णय की पुष्टि कर दी है। रविवार को संपन्न इस सभा में सर्वसम्मति से इसकी संपुष्टि की गयी। इस निर्णय से सम्मेलन के वर्तमान अध्यक्ष डा अनिल सुलभ अध्यक्ष पद के लिए पुनः प्रत्याशी हो सकते हैं।
अगस्त में समाप्त हो रहे, पाँच वर्ष के इस वर्तमान-सत्र की यह स्थायी समिति की अंतिम बैठक थी। इस बैठक में सात प्रस्तावों को सर्व-सम्मति से पारित किया गया, जिनमें मतदाता निरूपण समिति द्वारा अद्यतन की गयी सम्मेलन की मतदाता-सूची का अनुमोदन, निर्वाचन-पदाधिकारी से आगामी-सत्र के लिए सम्मेलन-अध्यक्ष के निर्वाचन हेतु प्रक्रिया आरम्भ करने का आग्रह, वित्तीय-वर्ष -२०२५-२६ का अंकेक्षण, स्थायी समिति के विगत पाँच वर्षों के कार्यकाल पर चर्चा सम्मिलित है।
राष्ट्र-गान से आरम्भ हुई इस बैठक में माननीय सदस्यों का अभिनन्दन करते हुए सम्मेलन-अध्यक्ष ने वर्तमान-कार्यकाल में सम्मेलन को प्राप्त हुई विशिष्ट उपलब्धियों का उल्लेख किया और स्पष्ट किया कि किस प्रकार सम्मेलन के उद्यम से इसकी प्रतिष्ठा संपूर्ण भारतवर्ष में और देश की सीमाओं को तोड़कर अंतर्रष्ट्रीय-स्तर पर हुई है।
बैठक में स्थायी समिति के वरिष्ठ सदस्य और पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो रास बिहारी सिंह, सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, उपाध्यक्ष बिहार सरकार के पूर्व विशेष सचिव डा उपेंद्रनाथ पाण्डेय, बिहार संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष और सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद, पूर्व प्राचार्या डा कल्याणी कुसुम सिंह, मुज़फ़्फ़रपुर ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री उदय नारायण सिंह, सारण ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष ब्रजेंद्र कुमार सिन्हा, बक्सर ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष महेश्वर ओझा ‘महेश’, आरा ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो बलिराज ठाकुर, पश्चिमी चंपारण ज़िला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री आनन्द किशोर मिश्र, लखीसराय ज़िला सम्मेलन के अध्यक्ष अरविंद कुमार भारती, उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार आज़ाद, सम्मेलन के अर्थमंत्री कुमार अनुपम, प्रचारमंत्री विभारानी श्रीवास्तव, लोकभाषा मंत्री डा पुष्पा जमुआर, संगठन मंत्री डा शालिनी पाण्डेय, पुस्तकालयमंत्री ईं अशोक कुमार, प्रबंधमंत्री कृष्ण रंजन सिंह, भवन-अभिरक्षक प्रवीर पंकज, वरिष्ठ सदस्य प्रो व्रजभूषण शर्मा, वरिष्ठ कवि आरपी घायल, शिवानन्द गिरि, डा संजय माँझी, डा इंदु पाण्डेय, डा विद्या चौधरी आदि माननीय सदस्यों ने विभिन्न प्रस्तावों पर अपने विचार रखे।
डा दिनेश कुमार दिवाकर, डा पूनम आनन्द, रामेश्वर नाथ विहान, आराधना प्रसाद, डा ऋचा वर्मा, श्रीकांत व्यास, जय प्रकाश पुजारी, डा मनोज गोवर्धनपुरी, प्रो उषा सिंह, सरिता कुमारी, शशि भूषण कुमार, आनन्द मोहन झा, प्रो अरुण कुमार सिन्हा, डा सत्या नारायण उपाध्याय, संजय शुक्ल, सिद्धेश्वर, ओम् प्रकाश पाण्डेय, अंबरीष कांत, राजेश भट्ट, शमा कौसर ‘शमा’, डा विद्या चौधरी, इंदु भूषण सहाय, डा नीतू सिंह, डा एम के मधु, डा रेणु मिश्र, डा सुमेधा पाठक, उर्मिला नारायण, अश्मजा प्रदर्शनी, ज्ञानेश्वर शर्मा, डा प्रतिभा रानी, शम्भु अमिताभ, सुनील कुमार दूबे,सुनील कुमार, डा पंकज पाण्डेय, नीरव समदर्शी, ई बाँके बिहारी साव, मनोज कुमार झा, लता प्रासर, शिवानन्द गिरि, अरुण कुमार श्रीवास्तव,बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता, जगदीश्वर प्रसाद सिंह, डा कुंदन लोहानी, अरुण कुमार निराला, मीरा प्रकाश, सुधांशु कुमार चक्रवर्ती, रामयतन यादव, नागेंद्र कुमार केशरी, उत्तरा सिंह, ज्योति मिश्र, प्रेमलता सिंह, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, नमिता लोहानी, डा पुरुषोत्तम कुमार, चंदा मिश्र, डा विपिन दूबे, निर्मला सिंह, डा इन्दु पाण्डेय, डा इपिन दूबे, शशिकांत तिवारी, आशा रघुदेव, धनंजय जयपुरी, सुरेश विद्यार्थी, श्याम मनोहर मिश्र, अभय सिन्हा, सुधीर मधुकर, सुरेश विद्यार्थी, डा अमरनाथ प्रसाद, आचार्य अनिमेश, नीता सहाय, पुनीता कुमारी समेत विभिन्न ज़िलों से आए प्रतिनिधियों के साथ सैकड़ों माननीय सदस्य उपस्थित हुए। स्मृति-रक्षा हेतु, सभा के अंत में सामूहिक-चित्र लिए गए। राष्ट्र-गान के साथ सभा की कार्यवाही संपन्न हुई।




























