टी.पी.एस. कॉलेज, पटना में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का सफल समापन
kaushlendra Pandey /पटना, 27 जुलाई 2026। टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के इतिहास विभाग द्वारा आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित 40 घंटे के “भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System–IKS): Understanding India’s Traditional Wisdom and Sustainable Future” विषयक प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने की, जबकि पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. मनोज कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने “Relevance of Indian Knowledge System (IKS) and National Education Policy (NEP) 2020” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक युगांतकारी परिवर्तन का दस्तावेज है, जिसका प्रमुख उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारतीय ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा औपचारिक शिक्षा की मुख्यधारा से अपेक्षाकृत दूर रही, किंतु नई शिक्षा नीति ने इसे पुनः शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करने का ऐतिहासिक प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि Indian Knowledge System (IKS) केवल प्राचीन ज्ञान का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक दृष्टि, दार्शनिक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सतत विकास की जीवन-दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें वैश्विक चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाने की दिशा में कार्य करती है। उन्होंने कहा कि बहुविषयक शिक्षा, भारतीय भाषाओं का संवर्धन, अनुभवात्मक अधिगम, अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास तथा मूल्यपरक शिक्षा जैसे प्रावधान भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने के प्रभावी माध्यम हैं।
प्राचार्य ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि भारतीय गणित, योग, आयुर्वेद, दर्शन, पर्यावरणीय ज्ञान, धातुकर्म, कृषि विज्ञान तथा शासन एवं आर्थिक चिंतन जैसी समृद्ध ज्ञान परंपराओं को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ समन्वित करते हुए विद्यार्थियों तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी तथा शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे नैतिक, नवाचारी, आत्मविश्वासी और उत्तरदायी नागरिक तैयार करना है जो भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित कर सकें।
उन्होंने इतिहास विभाग एवं आईक्यूएसी द्वारा आयोजित इस प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर साकार करने का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने पाठ्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कोर्स समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार एवं पूरी आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि उनके समर्पित प्रयासों से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों को समझने और आत्मसात करने का उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके मार्गदर्शन, नेतृत्व और संरक्षण में महाविद्यालय भविष्य में भी ऐसे नवाचारपूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करता रहेगा।
कोर्स समन्वयक डॉ. प्रशांत कुमार, सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि इस प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं समकालीन प्रासंगिकता से परिचित कराना था। उन्होंने प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य के सतत मार्गदर्शन, प्रेरणा, संरक्षण एवं आशीर्वाद के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही यह पाठ्यक्रम अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका। उन्होंने सभी संसाधन व्यक्तियों, आईक्यूएसी, शिक्षकगण तथा प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रो. मनोज कुमार, परीक्षा नियंत्रक, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रो. अंजलि प्रसाद, प्रो. नवेंदु शेखर एवं डॉ. दीपिका शर्मा (अर्थशास्त्र विभाग); प्रो. शशि भूषण चौधरी एवं डॉ. अश्विनी (हिन्दी विभाग); प्रो. विजय सिन्हा (दर्शनशास्त्र विभाग); डॉ. सुशोभन पलाधी, डॉ. उमेश एवं डॉ. सोनू प्रताप चौधरी (रसायनशास्त्र विभाग); डॉ. ऊषा किरण एवं डॉ. नूतन (राजनीति शास्त्र विभाग); प्रो. ज्योत्सना कुमारी एवं डॉ. सानंदा सिन्हा (जंतु विज्ञान विभाग) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुंद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए प्राचार्य, विशिष्ट अतिथि, सभी संसाधन व्यक्तियों, शिक्षकगण, प्रतिभागियों तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
समापन समारोह में महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र डॉ. अंकित तिवारी, शोधार्थी शिवम पराशर, महाविद्यालय के कर्मचारीगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। पूरे कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं अकादमिक उत्साह से परिपूर्ण रहा। प्रतिभागियों ने इस प्रकार के प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।