‘अटल साहित्यकार सम्मान’ से विभूषित हुए बिहार के हिन्दी-सेवी आजात-शत्रु थे अटल बिहारी बाजपेयी : संजय सरावगी
पटना, २६ अगस्त। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और लोकप्रिय कवि अटल बिहारी बाजपेयी भारत के महान नेताओं में से एक थे। वे अजात-शत्रु और सबके लिए सम्माननीय तो थे ही एक बड़े कवि साहित्यकार थे। अटल जी के व्यक्तित्त्व को किसी साँचे में नहीं रखा जा सकता। संसार को कानोकान खबर नहीं हुई और उन्होंने भारत को परमाणु-संपन्न बना दिया।
यह बातें बुधवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, ‘एडूकेशनल रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट संस्थान’ के तत्त्वावधान में, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और कवि अटल बिहारी बाजपेयी की स्मृति में आयोजित ‘अटल साहित्यकार सम्मान समारोह’ में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए, बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय सरावगी ने कही। उन्होंने सम्मानित हुए साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि अटल जी चाहते थे कि विकसित भारत के निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण होगी। अटल जी की स्मृतियाँ हमारे हृदयों में सदा जीवित रहेंगी।
समारोह मुख्य के अतिथि और प्रदेश भाजपा के संगठन महासचिव भीखू भाई दलसानिया ने कहा कि अटल जी के साहित्य में मातृ-भूमि के प्रति भक्ति की भावना है। उन्होंने राष्ट्र और राष्ट्रभाषा को माता के रूप में पूजा की। कविता हो या राजनीति उन्होंने इन्हें देश-सेवा का माध्यम माना।
अपने अध्यक्षीय उद्गार में सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि अटल जी यदि राजनीति में नहीं होते तो हिन्दी के महान महाकवियों में परिगणित होते। वे राष्ट्र और राष्ट्रभाषा के प्रति समर्पित भारत के गौरव-पुरुष थे। उनकी काव्य-प्रतिभा और काव्य-दृष्टि भी प्रदीप्त थी। उनकी वक्तृता ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भी प्रभावित किया था। नेहरू जी ने उनको बधाई देते हुए यह आशीष दिया था कि एक दिन आप भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। नेहरू जी की वह भविष्यवाणी सिद्ध हुई।
अरवल के विधायक मनोज शर्मा, अचल सिन्हा, डा शैलेश कुमार सिंह, अजीत चौधरी, जनार्दन शर्मा योगी, सुनील सिन्हा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत संस्थान के अध्यक्ष डा विनोद शर्मा ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन अधिवक्ता डा कौशलेन्द्र नारायण ने किया।
इस अवसर पर, वरिष्ठ साहित्यकार डा शंकर प्रसाद, डा कल्याणी कुसुम सिंह, प्रो बलिराज ठाकुर, ब्रजेंद्र कुमार सिन्हा, डा नन्दजी दूबे, रामेश्वर सिंह ‘विहान’, आराधना प्रसाद, डा पूनम आनन्द, डा पूनम देवा, डा पुष्पा जमुआर, लोकनाथ तिवारी ‘अनगढ़’, डा रामाश्रय प्रसाद सिन्हा, डा अशोक कुमार, डा कामेश्वर पंकज, डा विपिन दूबे, उदय नारायण सिंह, डा ध्रुव कुमार, कुमार अनुपम, ईं अशोक कुमार, डा विद्या चौधरी, डा प्रतिभा रानी, डा रेणु शर्मा, शशि भूषण कुमार, डा अरुण कुमार निराला, देशबंधु शर्मा, मोहन फ़तहपुरी, डा आलोक कुमार, ईं आनन्द किशोर मिश्र, डा मनोज गोवर्धनपुरी, पं उमेश मिश्र, प्रवीर कुमार पंकज, इन्दु भूषण सहाय, डा अर्चना त्रिपाठी, डा नीतू सिंह, अनीता मिश्र सिद्धि , रेणु मिश्रा, नमिता लोहानी, सुधीर मधुकर, नीरव समदर्शी, सुनील कुमार आदि हिन्दी-सेवियों को ‘अटल साहित्यकार सम्मान’ से विभूषित किया गया। मंच का संचालन आश्रिती शर्मा ने किया।