साहित्य सम्मेलन में ‘हिन्दी पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ का हुआ समापन, प्रतियोगिताओं में सफल १६ मेधावी छात्र-छात्राओं को किया पुरस्कृत, अंतिम दिन पुस्तकों की हुई भारी बिक्री
Kaushlendra pandey /पटना, १५ सितम्बर। हिन्दी समस्त भारतीय भाषाओं की परम हितैषी है। यह किसी भी भाषा का अहित नहीं चाहती। यह संपूर्ण भारत को जोड़कर एक महान राष्ट्र का उदय करेगी। इसे भारत की राष्ट्र-भाषा होनी ही चाहिए। हिन्दी शीघ्र ही देश की ‘राष्ट्र-भाषा’ बनेगी।

यह बातें, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्त्वावधान में, गत १ सितम्बर से आयोजित ‘हिन्दी-पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ के समापन-सह-पुरस्कार वितरण-समारोह को संबोधित करते हुए, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कही। उन्होंने कहा कि आज की बड़ी आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर हिन्दी का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। हिन्दी में इतनी ऊर्जा है कि यह संपूर्ण विश्व का मार्ग-दर्शन कर सकती है। यह संस्कृत के अत्यंत निकट है। यह घरवार, व्यवहार और प्यार-मनुहार की भाषा है।
पूर्व राज्यपाल ने, पखवारा के अंतर्गत छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित हुई विविध प्रतियोगिताओं में सफल १६ विद्यार्थियों को पुरस्कार-राशि,पदक और प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत भी किया।
समारोह के मुख्य अतिथि और राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्त्ति संजय कुमार ने विद्यार्थियों का उत्साह-वर्धन करते हुए कहा कि भारत के बाच्चों को गौरव के साथ हिन्दी को अपनाना और बढ़ाना चाहिए। जीवन के किसी भी क्षेत्र में हों हिन्दी से प्रेम बनाए रखें। ऐसा कर हम हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने में सहायक हो सकते हैं।
अपने अध्यक्षीय-संबोधन में सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि संपूर्ण भारत वर्ष में हिन्दी के प्रति प्रेम और श्रद्धा की भावना तीव्र-गति से बढ़ी है। दक्षिण और उत्तर-पूर्व का भी प्रबुद्ध-समाज अब यह मानने लगा है कि देश में अंग्रेज़ी का प्रभाव समाप्त किया जाना आवश्यक है और यह हिन्दी से ही संभव है।
आरंभ में अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के उपाध्यक्ष और ‘हिन्दी-पखवारा-सह-पुस्तक चौदस मेला’ के स्वागताध्यक्ष डा कुमार अरुणोदय ने कहा कि गत १५ दिनों में साहित्य सम्मेलन ने प्रतिदिन बड़े-बड़े उत्सव और विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिताओं के आयोजन कर अपने बड़े कर्तव्य को पूरा किया है। पुस्तक-मेला का भी आज समापन हो रहा है। आज अधिक से अधिक पुस्तकों का क्रय हो।
सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा उपेन्द्रनाथ पाण्डेय, डा शंकर प्रसाद, बच्चा ठाकुर, डा रत्नेश्वर सिंह, पं उमेश मिश्र, डा पूनम आनन्द तथा विभारानी श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
प्रतियोगिताओं में सफल निम्नलिखित विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया;- श्रुतलेख-प्रतियोगिता : कुलसुम हसन (प्रथम), अनुराग कुमार (द्वितीय), शिक्षा रानी (तृतीय) , निबन्ध-लेखन-प्रतियोगिता : रानी कुमारी (प्रथम), अमितेश राज (द्वितीय), सोनाक्षी चौधरी (तृतीय), काव्य-पाठ-प्रतियोगिता : सदफ आफ़रीन (प्रथम), अनिका लाल (द्वितीय), अंजलि प्रिया तथा आयुषी कुमारी (तृतीय) , व्याख्यान -प्रतियोगिता :निराली नीरज वासुदेव (प्रथम), फ़ातिमा (द्वितीय), सूर्यांश तथा अनुपमा अग्रवाल (तृतीय) , कथा-लेखन-प्रतियोगिता : सद्गुण देव (प्रथम), श्रेयसी सिंह (द्वितीय), आयुषि कुमारी (तृतीय) । प्रथम स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को एक हज़ार एक सौ रपए, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को सात सौ रपए तथा तृतीय स्थान पाने वालों को पाँच सौ रपए की पुरस्कार राशि दी गई। पुस्तक मेले के अंतिम दिन आज पुस्तकों की बड़ी संख्या में बिक्री हुई।
इस अवसर पर, सम्मेलन के पुस्तकालय मंत्री ईं अशोक कुमार, शमा कौसर ‘शमा’, डा सुषमा कुमारी, डा शालिनी पाण्डेय, सुजाता मिश्र, जय प्रकाश पुजारी, ईं आनन्द किशोर मिश्र, डा करुणा पीटर, चित्तरंजन लाल भारती, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, चंदा मिश्र, परवेज़ आलम, प्रवीर कुमार पंकज, नम्रता कुमारी, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, अनुभा गुप्ता, ज्ञानेश्वर शर्मा, बिंदेश्वर प्रसाद गुप्ता समेत विभिन्न विद्यालयों से आए बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित थे।