नहीं रहीं सुप्रसिद्ध कथा-लेखिका डा कल्याणी कुसुम सिंह / साहित्य समाज में शोक की लहर, सम्मेलन में आयोजित हुई शोक-गोष्ठी
पटना, ६अक्टूबर । सुप्रसिद्ध कथा-लेखिका और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा कल्याणी कुसुम सिंह नहीं रहीं। सोमवार की रात दो बजे, ८२ वर्ष की आयु में अपने पश्चिमी पटेलनगर स्थित अपने आवास पर उन्होंने अपनी अंतिम साँस ली। उनके निधन से साहित्य समाज में गहरा शोक व्याप्त है। निधन की सूचना मिलते ही साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ अपने संगठन मंत्री ईं अशोक कुमार और पूर्व अर्थमंत्री सुनील कुमार दूबे के साथ उनके आवास पर पहुँचे और पुष्पांजलि अर्पित की तथा शोक-संतप्त परिजनों को सांत्वना दी।
मंगलवार की संध्या सम्मेलन के अध्यक्षीय कक्ष में शोक-सभा भी आयोजित की गयी, जिसकी अध्यक्षता करते हुए डा सुलभ ने कहा कि कल्याणी जी विचार-संपदा और भाव-संपदा से अत्यंत समृद्ध और मनोवैज्ञानिक-दृष्टि रखनेवाली एक अत्यंत संवेदनशील कथाकार और कवयित्री थीं। विद्वता और विनम्रता उनकी शोभा थी। स्वतंत्रता-संग्राम में महिलाओं के योगदान और आचार्य नलिन विलोचन शर्मा पर लिखी गयी उनकी पुस्तक हिन्दी साहित्य की धरोहर हैं। उनकी लघुकथाओं के संग्रह ‘घटती उम्र और बढ़ती लालसाएँ’ पर गत २६ सितम्बर को ही सम्मेलन में चर्चा हुई थी। ३० सितम्बर को सम्मेलन के नए सत्र के लिए पुनर्गठित कार्य समिति के सभी पदाधिकारियों के पदभार-ग्रहण के समारोह में उपस्थित हुई थीं और उपाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया था।सम्मेलन के प्रति उनकी श्रद्धा अप्रतिम थी। उनके निधन से साहित्य और साहित्य सम्मेलन की ऐसी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई होने में वर्षों लगेंगे।
शोक व्यक्त करने वालों में वरिष्ठ कवयित्री आराधना प्रसाद, ईं अशोक कुमार, डा नागेश्वर प्रसाद यादव, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, नीता सहाय, पं गणेश झा, कृष्ण रंजन सिंह, डा शालिनी पाण्डेय, प्रवीर कुमार पंकज, शंभुनाथ पाण्डेय, ईं आनन्द किशोर मिश्र, नन्दन कुमार मीत,डा अर्चना त्रिपाठी तथा विजय कुमार सिंह के नाम सम्मिलित हैं।
आभासी माध्यम से सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शिववंश पाण्डेय, डा शंकर प्रसाद, डा उपेन्द्रनाथ पाण्डेय, रमेश कँवल, भावना शेखर, डा किशोर सिन्हा, शमा कौसर ‘शमा’ , निकहत आरा, डा पुष्पा जमुआर, डा पूनम आनन्द आदि सैकड़ों साहित्यकारों ने शोकोदगार व्यक्त किए।