सौरभ निगम/नई दिल्ली:भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन परिसर में ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया। यह पहल भारत की समृद्ध बौद्धिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
‘ग्रंथ कुटीर’ में भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं में लगभग 2,300 पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। इन पुस्तकों में दर्शन, साहित्य, विज्ञान, संस्कृति और ज्ञान की विविध परंपराओं का प्रतिनिधित्व होता है, जो भारत की प्राचीन सभ्यता की गहराई और व्यापकता को दर्शाता है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि शास्त्रीय भाषाओं में संचित ज्ञान-संपदा हमें अपने समृद्ध अतीत से सीखने और उसी आधार पर उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भारत की शास्त्रीय भाषाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी ज्ञान, मूल्यों और चिंतन की सशक्त स्रोत हैं।
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ‘ग्रंथ कुटीर’ जैसे प्रयास नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और शोध, अध्ययन व बौद्धिक विमर्श को नई दिशा देंगे।
‘ग्रंथ कुटीर’ को राष्ट्रपति भवन में एक ऐसे ज्ञान-केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जहां भारत की शास्त्रीय भाषाओं और उनकी विरासत को एक ही स्थान पर अनुभव किया जा सके।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)
प्रस्तुति: कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी



























