प्रियंका भारद्वाज /नई दिल्ली:देश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-इन) अग्रिम पंक्ति में कार्य कर रही है। वर्ष 2025 के दौरान सीईआरटी-इन ने अभूतपूर्व स्तर पर साइबर खतरों का मुकाबला करते हुए लाखों डिजिटल उपयोगकर्ताओं और संस्थानों को सुरक्षा प्रदान की है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सीईआरटी-इन ने 29.44 लाख से अधिक साइबर घटनाओं को प्रभावी ढंग से संभाला। इसके साथ ही, साइबर खतरों से समय रहते आगाह करने के लिए 1,530 अलर्ट, 390 भेद्यता संबंधी नोट्स (वulnerability Notes) तथा 65 परामर्शी (Advisories) जारी की गईं, जो देश की व्यापक और सशक्त राष्ट्रीय साइबर प्रतिक्रिया क्षमता को दर्शाती हैं।
साइबर सुरक्षा आकलन की दिशा में भी सीईआरटी-इन की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। अब तक 231 साइबर सुरक्षा मूल्यांकन (ऑडिट) से जुड़े संगठनों को पैनल में शामिल किया गया है, जिससे देश की महत्वपूर्ण सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी अवसंरचना में साइबर ऑडिट और भेद्यता आकलन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए साइबर स्वच्छता केंद्र के माध्यम से सीईआरटी-इन ने 98 प्रतिशत डिजिटल आबादी को कवर किया। इस पहल के तहत 1,427 संगठनों को जोड़ा गया और अब तक 89.55 लाख मैलवेयर रिमूवल टूल्स डाउनलोड किए जा चुके हैं, जिससे आम नागरिकों और संस्थानों को मैलवेयर से सुरक्षा मिली है।
सीईआरटी-इन के निरंतर और प्रभावी प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक मान्यता प्राप्त हुई है। विश्व आर्थिक मंच (WEF), ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फ्रांस की एएनएसएसआई (ANSSI) जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों ने एआई-संचालित खतरा पहचान, साइबर रेजिलिएंस, भरोसेमंद एआई ढांचे और नागरिक-केंद्रित मैलवेयर शमन के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को सराहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीईआरटी-इन की ये उपलब्धियां भारत को वैश्विक साइबर सुरक्षा मानचित्र पर एक सशक्त और भरोसेमंद डिजिटल राष्ट्र के रूप में स्थापित करती हैं।
प्रस्तुति: कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी



























