टी.पी.एस. कॉलेज, पटना में “भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System-IKS)” विषयक 40 घंटे के प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का भव्य शुभारम्भ
पटना, 20 जुलाई 2026। ठाकुर प्रसाद सिंह (टी.पी.एस.) कॉलेज, पटना के इतिहास विभाग द्वारा आई.क्यू.ए.सी. (IQAC) के तत्वावधान में आयोजित 40 घंटे के “भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System-IKS)” प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का शुभारम्भ सोमवार को कौटिल्य सभागार में गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा को भारत की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत की आधारशिला बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर विद्यार्थियों में ज्ञान, नैतिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना का विकास करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस पाठ्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने तथा भारतीय ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में भारतीय बौद्धिक परंपरा के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करने के साथ-साथ वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान की प्रासंगिकता को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। पाठ्यक्रम समन्वयक एवं इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य एवं आगामी सात दिवसीय शैक्षणिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत भारतीय दर्शन, विज्ञान, संस्कृति, शासन, पर्यावरण, योग, अर्थव्यवस्था तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक प्रो. रूपम, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेजेस प्रो. कृष्णनंदन प्रसाद, शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विजय सिन्हा, हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शशि भूषण चौधरी तथा वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. विनय भूषण ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में इसकी उपयोगिता तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा का गंभीर अध्ययन कर इसे आधुनिक शिक्षा और समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर हिन्दी विभाग के डॉ. ओंकार एवं डॉ. अश्विनी, रसायन विभाग के डॉ. सुशोभन पलाधी एवं डॉ. उमेश, राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. नूतन, अर्थशास्त्र विभाग की डॉ. दीपिका शर्मा, भौतिकी विभाग के डॉ. हंस एवं डॉ. चंद्रशेखर, गणित विभाग के डॉ. शशि शेखर सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुंद कुमार ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पंजीकृत विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
यह प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम 20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों पर व्याख्यान देंगे। महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गहन समझ विकसित करने, भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु भारतीय दृष्टिकोण को समझने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।