मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए बड़े निर्देश, डिजिटल फॉरेस्ट मॉनिटरिंग से इको-टूरिज्म तक बनाई कार्ययोजना
बिकास कुमार सिंह /रांची | कंट्री इनसाइड न्यूज़ एजेंसी/ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में वन संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता, इको-टूरिज्म और जनभागीदारी आधारित पौधारोपण को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक महीने के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसा सिस्टम विकसित किया जाए, जिसमें अलग-अलग टाइमलाइन के माध्यम से झारखंड में फॉरेस्ट कवर, पौधारोपण, वन्यजीव, राष्ट्रीय उद्यान एवं अन्य वन संबंधी बदलावों को वर्षों के अनुसार स्पष्ट रूप से देखा जा सके।
उन्होंने IFR (Individual Forest Rights) और CFR (Community Forest Rights) के तहत वन पट्टों के वितरण में तेजी लाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में झारखंड इस क्षेत्र में पीछे है। “अबुआ बीर, अबुआ दिशोम” अभियान के तहत शुरू हुए कार्यों को कल्याण विभाग के समन्वय से फिर तेज गति से आगे बढ़ाया जाए।
मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। साथ ही विभाग के टोल-फ्री नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया ताकि आम लोग अपनी समस्याएं और सुझाव आसानी से विभाग तक पहुंचा सकें।
बैठक में मुख्यमंत्री ने नई योजना बनाकर व्यावसायिक प्रजातियों के पौधारोपण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से बांस और काजू जैसी प्रजातियों के बड़े पैमाने पर रोपण पर बल दिया तथा Acacia जैसी प्रजातियों को बढ़ावा नहीं देने की बात कही। उन्होंने सीड बॉल तकनीक के माध्यम से बड़े क्षेत्रों में पौधारोपण अभियान चलाने का भी निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम सभा स्तर पर जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए व्यावसायिक पौधारोपण को अभियान के रूप में चलाया जाए। उन्होंने ट्रांजिट टैक्स कलेक्शन की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए।
इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए JETA के माध्यम से सभी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने, विभाग में लंबित नियुक्तियों को शीघ्र पूरा करने तथा राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में भी व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना सहित अन्य योजनाओं को कार्बन क्रेडिट से जोड़ते हुए राज्य के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाई जाए और शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी के माध्यम से झारखंड को सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
— कंट्री इनसाइड न्यूज़ एजेंसी