kaushlendra Pandey /केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि खदानों का वैज्ञानिक तरीके से बंद किया जाना (Mine Closure) भारत की सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने यह बात “आरोह (AAROH) – वार्षिक खान बंदी रिपोर्ट” जारी करते हुए कही।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की खान बंदी यात्रा यह साबित करती है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर्यावरणीय चुनौतियों को विकास के अवसरों में बदलने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने जोर दिया कि खनन के बाद प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक पुनर्वास, पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सतत विकास, प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। वैज्ञानिक तरीकों से खदानों का पुनर्विकास न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि देश के हरित विकास (Green Growth) और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती देगा।
यह रिपोर्ट विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology) द्वारा तैयार की गई है, जिसमें भारत में खदानों के वैज्ञानिक बंदीकरण, पुनर्वास और पर्यावरणीय पुनर्स्थापन से जुड़े प्रयासों और उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया गया है।
— कंट्री इनसाइड न्यूज़ एजेंसी