टी. पी. एस. कॉलेज, पटना में बाबासाहेब आपटे जयंती पर एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित
Kaushlendra Pandey / , 2 सितम्बर। टी. पी. एस. कॉलेज, पटना में भारतीय इतिहास संकलन समिति, दक्षिण बिहार एवं महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में बाबासाहेब आपटे जयंती के अवसर पर “राष्ट्र निर्माण में इतिहास की भूमिका : भारतबोध, सांस्कृतिक चेतना और युवा पीढ़ी” विषयक एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन, दीप प्रज्ज्वलन तथा भारत माता एवं बाबासाहेब आपटे के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि बाबासाहेब आपटे एक मौलिक चिंतक, दूरदर्शी विचारक और कर्मयोगी थे। वे संस्कृत, हिंदी और मराठी भाषा के प्रकांड विद्वान थे तथा संगठन निर्माण, भारतीय इतिहास के राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से पुनर्लेखन, प्राचीन भारतीय इतिहास के शोध एवं संकलन तथा मातृभाषाओं के विकास के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब का जीवन आदर्श आचरण, राष्ट्रनिष्ठा और सेवा-भाव का प्रेरणास्रोत है।
प्रधानाचार्य महोदय ने कहा कि महाविद्यालयों का दायित्व केवल औपचारिक शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में बौद्धिक जिज्ञासा, शोध प्रवृत्ति, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से टी. पी. एस. कॉलेज में समय-समय पर व्याख्यानमाला, संगोष्ठी, कार्यशाला, प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर चिंतन करने, विशेषज्ञों के विचारों से परिचित होने तथा समसामयिक एवं राष्ट्रीय विषयों पर गंभीर विमर्श का अवसर प्रदान करते हैं।
मुख्य वक्ता प्रो. अरविन्द कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि “इतिहास जीवन की मार्गदर्शिका है तथा युवाओं के लिए एक जीवंत पथ-प्रदर्शक का कार्य करता है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में इतिहास की भूमिका केवल अतीत का अध्ययन या गुणगान करना नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की सुदृढ़ नींव तैयार करना भी है। उन्होंने युवाओं को इतिहास और भविष्य के बीच की सेतु बताते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए युवा पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय विरासत से जुड़ना होगा। उनके अनुसार इतिहासबोध के बिना राष्ट्रीय आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास संभव नहीं है।
आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. रूपम ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों का दायित्व केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक बोध और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से इतिहास के गंभीर अध्ययन एवं शोध की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. प्रशांत कुमार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए बाबासाहेब आपटे के जीवन एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बाबासाहेब आप्टे ने इतिहास लेखन में विद्यमान औपनिवेशिक दृष्टिकोण की सीमाओं को रेखांकित करते हुए भारतीय दृष्टि से इतिहास के अध्ययन और पुनर्पाठ की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के पीछे बाबासाहेब आप्टे की प्रेरणा और दूरदृष्टि निहित है।
भारतीय इतिहास संकलन समिति, दक्षिण बिहार के महासचिव श्री शैलेश शर्मा ने अपने संबोधन में बाबासाहेब आपटे के संगठनात्मक योगदान तथा भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन के लिए किए गए उनके प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतिहास संकलन का कार्य केवल अतीत को संरक्षित करने का प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता को सुदृढ़ करने का अभियान है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मुकुंद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन डॉ. नूपुर द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रो. विजय सिन्हा, प्रो. हेमलता सिंह, प्रो. शशि भूषण चौधरी, प्रो. नवेंदु शेखर, डॉ. दीपिका शर्मा, डॉ. सुशोभन पलाधी, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. सोनू प्रताप चौधरी, डॉ. विनय भूषण, डॉ. रवि प्रभाकर, डॉ. सानंदा सिन्हा, डॉ. नूतन, डॉ. देबारति घोष, डॉ. हंस सिंह, डॉ. चंद्रशेखर ठाकुर, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. शशि शेखर सिंह, डॉ. तरन्नुम, श्री रामनिवास शर्मा तथा डॉ. राहुल झा सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक उपस्थित थे।
शोधार्थियों में रौशन कुमार, ईशा शर्मा, आकाश कुमार एवं प्रशांत कुमार तथा विद्यार्थियों में दुर्गेश नंदिनी, आकाश कुमार, शीतल छाया, मुस्कान सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र निर्माण, भारतबोध एवं सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन हेतु सामूहिक संकल्प व्यक्त किया गया।