बिहार में 45 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं; डबल इंजन सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है दोनों इंजन में आग लगी हुई है जिस कारण सहायता राशि नहीं मिल रही है : तेजस्वी प्रसाद यादव
Kaushlendra pandey /पटना 13 सितंबर 2026 : राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने आज अपने आवास 01, पोलो रोड में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी को बिहार में बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और प्रभावित परिवार को मुआवजा तथा विशेष आर्थिक पैकेज की मांग के लिए चिट्ठी लिखी है,लेकिन अब तक इस दिशा में केंद्र सरकार की ओर से कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इन्होंने कहा कि 45 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, मुख्यमंत्री को भी चिट्ठी लिखी लेकिन कोई इसका रिस्पांस नहीं लिया जा रहा है। बिहार में डबल इंजन सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है, दोनों इंजन में आग लग गई है जिस कारण लोगों को सहायता नहीं मिल पा रही है, अभी तक कोई सुनवाई और कार्रवाई नहीं हुई है । बिहार से एनडीए के सात मंत्री हैं और 31 लोकसभा के सांसद हैं लेकिन बिहार के लोगों को उनके हालात पर छोड़ दिया गया है । बिहार में राज्य सरकार ने जुलाई में आकस्मिक निधि फंड से 4000 करोड़ रूपया निकाला है जिसे सरकार के स्तर से वेतन मद और अन्य तरह के कार्यों में खर्च के लिए पैसे निकालें गये। बिहार में खजाना खाली है बिहार में केंद्र सरकार के मंत्री की कोई हैसियत नहीं है कि वह केंद्रीय सहायता दिला सके। हमने जो किचन और रसोई बार पीड़ितों के लिए चल रहा है उसका लिस्ट मांगा लेकिन वह नहीं दिए जा रहे हैं।
श्री तेजस्वी ने आगे कहा कि कोशी में आए बाढ़ के समय लालू जी ने बिहार को विशेष पैकेज दिलवाया। उस समय कोशी बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने आकर बाढ़ पीड़ितों को सहायता राशि दी थी और बाढ़ पीड़ितों को न्याय दिया था। जबकि नरेंद्र मोदी सरकार बिहार के प्रति किस तरह का व्यवहार रखती है यह इसी से समझा जा सकता है के बिहार के प्रति उनका क्या सोच है। जबकि गुजरात में बारिश भी हो जाती है तो सरकार के स्तर से राहत शिविर और हर संभव मदद दिया जाता है। आपदा के समय बिहार के लोगो को भाजपा और केंद्र के नेता इग्नोर कर देते हैं, जबकि जैसे ही चुनाव का समय आता है वोट के लिए प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक बिहार में ही विराजमान हो जाते हैं।
इन्होंने आगे कहा कि बिहार के साथ सौतेलेपन का व्यवहार हो रहा है भाजपा शासित राज्यों से भी मदद नहीं मिलता है और जो भी केंद्रीय मंत्री आ रहे हैं कोई सहायता राशि नहीं मिलता है। बिहार में बाढ़ के स्थाई समाधान की दिशा में डबल इंजन सरकार का कोई ध्यान नहीं है और ना ही आपदा में सरकार के स्तर से कोई मदद दी जाती है। बिहार में चुनाव के समय अमित शाह बिहार में बाढ़ से निजात की बात करते हैं लेकिन आज वह कहां है एक बार भी उनका बयान तक नहीं आता जबकि बिहार के 45 लाख लोग बाढ़ के विभीषिका में फंसे हुए हैं।बिहार के प्रति केंद्र और राज्य का किस तरह का व्यवहार है यह इसी से समझा जा सकता है सरकार में बैठे लोग इस मामले पर गंभीर नहीं है।
इन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के बीच जब मैं गया तो मुझे इस तरह का वोट दिया गया जिसका हवा बीच नदी में ही निकल गया गांव के लोगों ने किसी तरह से बचाया । हमने नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से हालात का जायजा लिया और सरकार से बाढ़ पीड़ितों को मदद और सहायता राशि दी जाए इसकी मांग की ,लेकिन सरकार में बैठे हुए लोग बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा और दुख को सामने लाने पर भी सवाल खड़ा करते हैं जबकि सरकार के द्वारा किए गए गलत कार्यों को जनता के सामने लाते हैं तो सरकार के लोग इस पर गंभीरता नहीं दिखाते हैं। सरकार का इस तरह का कार्यकलाप लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है, सरकार जनता के लिए कोई काम नहीं कर रही है।
इन्होंने आगे कहा कि पत्रकारों के द्वारा सवाल पूछने पर सरकार को बुरा लगता है और पत्रकारों को मंत्री से लेकर के पुलिस तक पीटने का काम कर रही है । इनको प्रताड़ित कर रही है ,क्योंकि सरकार में बैठे हुए लोग सच और सच्चाई देखना नहीं चाहते हैं। संवाददाता सम्मेलन में विधानसभा में राजद के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत पासवान एवं प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद भी उपस्थित थे।