नीतीश कुमार पर टिप्पणी कांग्रेस की राजनीतिक हताशा का प्रमाण – डा0 निहोरा प्रसाद यादव
01 अक्टूबर 2026, पटना।जद (यू0) प्रदेश प्रवक्ता डा0 निहोरा प्रसाद यादव ने जारी बयान में कहा कि दिल्ली में आयोजित इंडी गठबंधन की बैठक में श्री नीतीश कुमार जी पर सोनिया गांधी की टिप्पणी उनकी अपनी राजनीतिक असफलता की खीझ को दर्शाती है। श्री नीतीश कुमार जैसे अनुभवी और सुशासन के लिए देश-विदेश में चर्चित नेता पर टिप्पणी करने की बजाय कांग्रेस नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए।
कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा और रणनीति लंबे समय से असमंजस और अंतर्विरोधों से घिरी रही है। यही वजह है कि जिस नेता ने विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की पहल की, उसी के खिलाफ कांग्रेस नेतृत्व आज आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहा है। श्री नीतीश कुमार जी के दो दशक से अधिक लंबे सार्वजनिक जीवन और उनके शासन की नीतियों का अध्ययन देश ही नहीं, विदेशों में भी हुआ है तथा विभिन्न स्तरों पर उनकी नीतियों की चर्चा होती रही है।
कांग्रेस में इंडी गठबंधन को लेकर शुरू से ही दो तरह की सोच रही है। एक वर्ग ऐसा है जो श्री नीतीश कुमार जी के गठबंधन से अलग होने को लेकर चिंतित रहा, जबकि दूसरा वर्ग अपनी राजनीतिक विफलताओं का ठीकरा उन पर फोड़ने में लगा है। सोनिया गांधी की टिप्पणी इसी राजनीतिक हताशा का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की पहल श्री नीतीश कुमार जी ने की थी। उनकी पहल पर पटना में विपक्षी दलों की महत्वपूर्ण बैठक हुई और आगे चलकर इंडी गठबंधन का स्वरूप सामने आया। लेकिन कांग्रेस की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और सीट-बंटवारे सहित विभिन्न मुद्दों पर उसके रवैये ने गठबंधन की एकजुटता को प्रभावित किया। अंततः श्री नीतीश कुमार जी ने गठबंधन से अलग होने का निर्णय लिया।
कांग्रेस को अपनी राजनीतिक रणनीति की समीक्षा करने के बजाय श्री नीतीश कुमार जी पर आरोप लगाने से बचना चाहिए। गठबंधन की राजनीति में सभी दलों के सम्मान, संवाद और सहमति का महत्व होता है। किसी एक दल की राजनीतिक इच्छाओं को अन्य सहयोगी दलों पर थोपने की कोशिश गठबंधन को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर करती है।
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी को श्री नीतीश कुमार जी पर टिप्पणी करने के बजाय कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और गठबंधन प्रबंधन की विफलताओं पर आत्ममंथन करना चाहिए। किसी नेता पर आरोप लगाने से राजनीतिक वास्तविकताएं नहीं बदलतीं। जनता सब देख रही है और समय आने पर अपना निर्णय देती है।