CIN /गीता के उपदेश का व्यावहारिक रूप थे ‘जगतबंधु’, पर्यावरण के प्रतीक हैं मेहता नगेंद्र
CIN -पटना, २३ जुलाई। अपने जीवन को किस प्रकार मूल्यवान और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है, इसके जीवंत उदाहरण और प्रेरणा-पुरुष थे, जगत नारायण प्रसाद ‘जगतबंधु’। वे ‘गीता’ को अपने जीवन में उतारने वाले सदपुरुष और साहित्यकार थे। कहा जाए…
CIN /संकट के दिनों में साहित्य सम्मेलन के ढाल बने डा जगदीश पाण्डेय,जयंती पर सम्मेलन ने अपने पूर्व अध्यक्ष को श्रद्धापूर्वक किया स्मरण
पटना, १६ जुलाई। डा जगदीश पाण्डेय पेशे से अभियन्ता थे। राज्य सरकार में अपनी सेवा के शीर्ष पद से अवकाश लेने के पश्चात उन्होंने अपना शेष जीवन लोक-कल्याणकारी कार्यों में लगाया। कला, संगीत और साहित्य समेत सभी सारस्वत विधाओं में उनकी गहरी अभिरुचि थी। वे…
CIN /साहित्य सम्मेलन में ‘डा दीनानाथ शरण स्मृति-कक्ष’ का हुआ लोकार्पण
पटना, २६ जून । सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने बुधवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पुस्तकालय में नव-निर्मित ‘डा दीनानाथ शरण स्मृति-कक्ष’ का लोकार्पण किया। डा शरण की जयंती पर आयोजित इस समारोह में श्री प्रसाद ने सुख्यात कवि…
CIN /डा सुरेंद्र प्रसाद जमुआर ,बड़े सर्जन और सर्जक थे डा जितेंद्र सहाय, शांति जैन को सुनना एक अनुभूति थी -जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने श्रद्धापूर्वक तीनों विभूतियों को किया स्मरण, दी काव्यांजलि
पटना, १ जुलाई। अनेक अलक्षित साहित्यकारों को प्रकाश में लाने वाले स्तुत्य लेखक डा सुरेंद्र प्रसाद जमुआर एक ऐसे विनम्र साधक थे, जिन्होंने कठोर श्रम कर बिहार के सैकड़ों बिसरा दिए गए साहित्यकारों को उनकी समग्रता में स्मरण किया और उनके महान कार्यों से संसार…
पटना, २६ जून/ सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने बुधवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पुस्तकालय में नव-निर्मित ‘डा दीनानाथ शरण स्मृति-कक्ष’ का लोकार्पण किया
पटना, २६ जून । सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने बुधवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के पुस्तकालय में नव-निर्मित ‘डा दीनानाथ शरण स्मृति-कक्ष’ का लोकार्पण किया। डा शरण की जयंती पर आयोजित इस समारोह में श्री प्रसाद ने सुख्यात कवि…
CIN /बरगद सा पिता : तीसरी पीढ़ी का सहारा,“बिक्री ना हो/बाज़ार उपलब्ध ना हो तो कला विलुप्त हो जाती है”
(भारतीय चित्रकला की एक अद्भुत शैली है काजली सीही/पटना कलम, मुगल कलाकारों द्वारा 18 वीं शताब्दी में बनाया गया था और तब इस कलाकृतियों के प्रमुख खरीदार अंग्रेज़ हुआ करते थे जो इसे स्मृति चिन्ह के रूप में पटना से खरीदते थे। यह चित्रकला की दुनिया का पहला…
CIN /साहित्य सम्मेलन की स्थापना के मुख्य सूत्रधार थे रामधारी प्रसाद विशारद,१२४वीं जयंती पर साहित्य सम्मेलन में श्रद्धा पूर्वक की गए स्मरण
पटना, ११ जून। हिन्दी के अनन्य सेवी और मनीषी विद्वान रामधारी प्रसाद ‘विशारद’ के सदप्रयास और सक्रियता से ही बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई थी। वे इसके मुख्य सूत्रधार थे। सबसे पहले इनके ही मन में प्रांतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन की…
CIN /साहित्य सम्मेलन की स्थापना के मुख्य सूत्रधार थे रामधारी प्रसाद विशारद,१२४वीं जयंती पर साहित्य सम्मेलन में श्रद्धा पूर्वक की गए स्मरण
पटना, ११ जून। हिन्दी के अनन्य सेवी और मनीषी विद्वान रामधारी प्रसाद ‘विशारद’ के सदप्रयास और सक्रियता से ही बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई थी। वे इसके मुख्य सूत्रधार थे। सबसे पहले इनके ही मन में प्रांतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन की…
CIN /आदर्शवादी शिक्षाविद और भाव-प्रवण कवि थे मेजर बलबीर सिंह ‘भसीन’,साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ ‘४था स्मृति-पर्व’
पटना, ८ जून। मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मेजर (डा) बलबीर सिंह ‘भसीन’ अपने सिद्धांतों पर कभी भी समझौता नही करने वाले एक आदर्शवादी शिक्षाविद तो थे ही, एक अत्यंत भाव-प्रवण कवि-साहित्यकार भी थे। उनकी पुस्तकें ‘एक सफ़र हिन्दोस्तान से…
CIN /प्रकृति-राग के कवि और एकल साहित्यिक-कार्यशाला थे आचार्य कलक्टर सिंह केसरी,जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना, ५ जून। प्रकृति के मुग्धकारी रूप और सुषमा को काव्य में पिरोनेवाले कृतात्मा कवि कलक्टर सिंह ‘केसरी’ पिछली पीढ़ी के एक ऐसे कवि और विद्वान आचार्य थे, जिन्हें ‘प्रकृति-राग’ का अमर गायक माना जाता है। आधुनिक हिन्दी के काव्य-इतिहास…
CIN /पूर्व राज्यपाल ने साहित्य सम्मेलन के ‘श्याम बिहारी अलंकरण-कक्ष’ का किया लोकार्पण,आयोजित हुई कवि-गोष्ठी
पटना, १९ मई। सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद द्वारा रविवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन सभागार का नव-विकसित अलंकरण-कक्ष लोकार्पित हुआ। इस अलंकरण-कक्ष को, ९२वें वर्षीय कवि और रंगकर्मी श्याम बिहारी प्रभाकर के सम्मान में समर्पित किया गया है। अपने…
CIN /विलक्षण समालोचक और अद्भुत अध्येता था डा नन्द किशोर ‘नवल’,स्मृति दिवस पर आयोजित हुआ परिसंवाद, हुई लघुकथा-गोष्ठी
पटना, १३ मई । पटना विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक रहे प्रो नन्द किशोर ‘नवल’ हिन्दी और अंग्रेज़ी के ख्यातिनाम विद्वान ही नहीं एक विलक्षण समालोचक और अद्भुत अध्येता थे। हिन्दी साहित्य को अपनी तीक्ष्ण प्रतिभा और व्यापक अनुशीलन से समृद्ध…