गुलों में रंगो-बू भी है उनसे, उन्हीं पे जानो-दिल लुटाता हूँ । पं बुद्धिनाथ झा ‘कैरव’ की जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ कवि-सम्मेलन
पटना – कैशलेन्द्र पाण्डेय, पटना, १८ नवम्बर। गुलों में रंगो–बू भी है उनसे/ उन्हों पे जानो–दिल लुटाता हूँ — , “ भूख लगे तो मिट्टी–सोना एक बराबर लगता है —- जैसी पंक्तियाँ हवा में तैरती रहीं और गीत–ग़ज़ल के कदरदान…
‘बटोहिया-गीत’ से साहित्य-संसार में अमर हो गए बाबू रघुवीर नारायण । १३६ वीं जयंती पर साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ भव्य कवि-सम्मेलन
पटना से कौशलेन्द्र पराशर, पटना, ३० अक्टूबर। “सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसबा से मोरे प्राण बसे हिम खोह रे बटोहिया” जैसी प्राण–प्रवाही और मर्म–स्पर्शी रचना के अमर रचयिता बाबू रघुवीर नारायण भोजपुरी और हिंदी के महान कवि हीं नहीं एक…
बहुभाषाविद विद्वान और साधु-पुरुष थे आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव । जयंती पर साहित्य सम्मेलन ने अपने पूर्व प्रधानमंत्री को दी श्रद्धांजलि
पटना से कौशलेन्द्र, पटना,२८ अक्टूबर। बहुभाषाविद विद्वान और सरस्वती के वरद–पुत्र आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव एक साहित्यिक साधु–पुरुष थे। उन्होंने एक संत की भाँति साहित्य की आध्यात्मिक–साधना की। ७० वर्षों से अधिक समय तक निरंतर…
प्रबुद्ध हिंदू समाज का उद्देश्य सभी प्रकार के विद्वेष को मिटाकर मनुष्यता मूलक विश्व का निर्माण। २८वें स्थापना दिवस समारोह में वक्ताओं ने समाज के सभी प्रबुद्धजनों का आह्वान किया
पटना,१३ अक्टूबर। प्रबुद्ध हिन्दू समाज का उद्देश्य छुआछूत समेत समाज की सभी कुरीतियों और विद्वेष को मिटाकर, मनुष्यता मूलक विश्व मानव समुदाय का निर्माण है। भारतीय वैदिक संस्कृति का यही स्वर है। हम संपूर्ण वसुधा को एक कुटुंब की तरह देखते हैं। इसमें सम्पूर्ण…
साहित्य सम्मेलन में कथा संग्रह ‘प्रिसाइडिंग औफिसर की डायरी’ का हुआ लोकार्पण
पटना, ३१ जुलाई। सुपरिचित कथाकार चितरंजन लाल भारती की कहानियाँ यथार्थ पर कल्पना की चासनी जैसी मीठी, किंतु मर्म-स्पर्शी हैं। इनकी अनेक कहानियों में अनेक स्थलों पर ‘कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद’ दिखाई देते हैं। इसलिए भारती की कहानियाँ प्रेमचंद के…