Kaushlendra Pandey /कन्हैया का मास्टरस्ट्रोक, कांग्रेस में बड़ा बदलाव – अखिलेश सिंह की कुर्सी गई.बिहार कांग्रेस में बड़ा फेरबदल हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को उनके पद से हटा दिया गया और उनकी जगह अब राजेश कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव के पीछे कांग्रेस नेतृत्व की दूरगामी रणनीति और खासतौर पर कन्हैया कुमार की बढ़ती सियासी पकड़ को अहम माना जा रहा है।दरअसल, जब कन्हैया कुमार ने बिहार में अपनी यात्रा की घोषणा की, तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने इसे हल्के में लिया। वे लगातार मीडिया को यह समझाने में लगे थे कि इस यात्रा से कांग्रेस को कोई बड़ा फायदा नहीं होने वाला। उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ मिलकर काम करना चाहिए और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन कांग्रेस आलाकमान की सोच इससे बिल्कुल अलग थी।कांग्रेस नेतृत्व खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बिहार में पार्टी को लालू परिवार के प्रभाव से बाहर निकालना चाहते थे। कन्हैया कुमार प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ सीधा हमला बोलते हैं और कांग्रेस को बिहार में एक स्वतंत्र ताकत के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। उनकी यात्रा की शुरुआत भितरवा आश्रम से हुई, और यहीं यह साफ हो गया कि अब कांग्रेस अपनी अलग पहचान बनाएगी।यात्रा के दौरान कन्हैया कुमार के बढ़ते प्रभाव और उनकी आक्रामक राजनीति ने आलाकमान को स्पष्ट संदेश दिया कि बिहार कांग्रेस को पुराने ढर्रे से बाहर निकालने की जरूरत है। महज 24 घंटे के भीतर कन्हैया ने अखिलेश सिंह की ‘बली’ ले ली और कांग्रेस नेतृत्व ने नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के सामने दो ही रास्ते थे—या तो बिहार में कांग्रेस को लालू परिवार के साए में रखकर कमजोर बने रहने दिया जाए, या फिर उसे स्वतंत्र और मजबूत पार्टी के रूप में खड़ा किया जाए। कांग्रेस नेतृत्व ने दूसरा रास्ता चुना, और इसका नतीजा अखिलेश सिंह की विदाई के रूप में सामने आया।अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस बिहार में खुद को कितना मजबूत कर पाती है और क्या कन्हैया कुमार इस नए बदलाव के मुख्य चेहरे बनकर उभरेंगे।

























