Kaushlendra Pandey, नई दिल्ली ब्यूरो:बिहार समेत देशभर की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवादों के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने घोषणा की है कि 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक एक विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में नाम जोड़ने (फॉर्म-6), नाम हटवाने (फॉर्म-7), या सुधार (फॉर्म-8) के लिए आवेदन कर सकता है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य मतदाता अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न रहे। आवेदन की सुविधा ऑनलाइन (www.nvsp.in) और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) भी इस प्रक्रिया में लोगों की सहायता करेंगे।
यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है जब बिहार सहित कई राज्यों में विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम गायब होने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे। कई दलों ने तो आरोप लगाया था कि लाखों वोटर बिना सूचना के सूची से बाहर कर दिए गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
चुनाव आयोग की इस पहल से उन सभी दलों और मतदाताओं को राहत मिलेगी, जिनका नाम छूटा था या गलती से हटाया गया था। खासकर पहली बार वोट डालने जा रहे युवा, जो 1 जनवरी 2025 को या उससे पहले 18 वर्ष के हो चुके हैं, वे अब अपने नाम मतदाता सूची में दर्ज करवा सकते हैं।
चुनाव आयोग का यह कदम न सिर्फ मतदाता जागरूकता को बढ़ावा देगा बल्कि लोकतंत्र की पारदर्शिता और समावेशिता को भी मजबूत करेगा। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है ताकि हर योग्य मतदाता का नाम सूची में सुनिश्चित हो सके।
यह विशेष अभियान आने वाले चुनावों की निष्पक्षता और भरोसेमंद प्रक्रिया की बुनियाद को और मजबूत करेगा।


























