प्रियंका भारद्वाज रांची। कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी। हूल दिवस के अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री ने संताल हूल के महानायक सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित सभी वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हूल की मशाल आज भी अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने तथा न्याय, सम्मान और अधिकार की लड़ाई को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 जून 1855 को संताल परगना के भोगनाडीह से शुरू हुआ संताल हूल केवल एक विद्रोह नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा का ऐतिहासिक आंदोलन था। इस आंदोलन के वीर सेनानियों ने अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन अन्याय के सामने कभी झुके नहीं।
उन्होंने कहा कि हूल के वीरों का त्याग और संघर्ष झारखंड की पहचान और गौरव का आधार है। उनकी विरासत आज भी समाज को अन्याय, शोषण और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
मुख्यमंत्री ने झारखंडवासियों को हूल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे करने जा रहा है और नए संकल्प तथा नई ऊर्जा के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार शहीदों के सपनों को साकार करने तथा जल, जंगल, जमीन और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने अंत में सभी झारखंडवासियों से हूल के महानायकों के आदर्शों पर चलने और न्याय, समानता तथा सम्मान पर आधारित समाज के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए “हूल जोहार!” का संदेश दिया।
























